01-02-2019-Hin

"मीठे बच्चे - तुम्हारे मोह की रगें अब टूट जानी चाहिए क्योंकि यह सारी दुनिया विनाश होनी है, इस पुरानी दुनिया की किसी भी चीज़ में रूचि न हो''

Q- जिन बच्चों को रूहानी मस्ती चढ़ी रहती है, उनका टाइटिल क्या होगा? मस्ती किन बच्चों को चढ़ती है?

A- रूहानी मस्ती में रहने वाले बच्चों को कहा जाता है - 'मस्त कलंधर', वही कलंगीधर बनते हैं। उन्हें राजाईपने की मस्ती चढ़ी रहती है। बुद्धि में रहता - अभी हम फ़कीर से अमीर बनते हैं। मस्ती उन्हें चढ़ती जो रूद्र माला में पिरोने वाले हैं। नशा उन बच्चों को रहता है जिन्हें निश्चय है कि हमें अब घर जाना है फिर नई दुनिया में आना है।

D- 1) सदा इसी नशे में रहना है कि हम मास्टर ज्ञान सागर हैं, स्वयं में ज्ञान की ताकत भरकर चुम्बक बनना है, रूहानी पैगम्बर बनना है।-----2) कोई ऐसा कर्म नहीं करना है जिससे सतगुरू बाप का नाम बदनाम हो। कुछ भी हो जाये लेकिन कभी भी रोना नहीं है।

V- ज्ञान के साथ गुणों को इमर्ज कर सर्वगुण सम्पन्न बनने वाले गुणमूर्त भव-----हर एक में ज्ञान बहुत है, लेकिन अब आवश्यकता है गुणों को इमर्ज करने की इसलिए विशेष कर्म द्वारा गुण दाता बनो। संकल्प करो कि मुझे सदा गुणमूर्त बन सबको गुण मूर्त बनाने के कर्तव्य में तत्पर रहना है। इससे व्यर्थ देखने, सुनने वा करने की फुर्सत नहीं मिलेगी। इस विधि से स्वयं की वा सर्व की कमजोरियाँ सहज समाप्त हो जायेंगी। तो इसमें हर एक अपने को निमित्त अव्वल नम्बर समझ सर्वगुण सम्पन्न बनने और बनाने का एक्जैम्पल बनो।

S- मंसा द्वारा योगदान, वाचा द्वारा ज्ञान दान और कर्मणा द्वारा गुणों का दान करो।