02-01-2019-Hin

"मीठे बच्चे - इस पुरुषोत्तम संगमयुग में पुरुषोत्तम बनने का पूरा-पूरा पुरुषार्थ करो, जितना हो सके याद और पढ़ाई पर अटेन्शन दो''

Q- तुम बच्चे बहुत बड़े व्यापारी हो, तुम्हें हमेशा किस बात पर ध्यान दे विचार करना चाहिए?

A- हमेशा घाटे और फायदे पर विचार करो। अगर इस पर विचार नहीं किया तो प्रजा में दास दासी बनना पड़ेगा। बाप 21 जन्मों की राजाई का जो वर्सा देते हैं उसे गँवा देंगे इसलिए बाप से पूरा सौदा करना है। बाप है दाता, तुम बच्चे सुदामे मिसल चावल मुट्ठी देते हो और विश्व की बादशाही लेते हो।

D- 1) संग से अपनी बहुत सम्भाल करनी है। एक सत बाप का संग करना है। माया 5 विकारों के संग से बहुत दूर रहना है।-----2) पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना है। अपनी मस्ती में रहो। कहा जाता अपनी घोट तो नशा चढ़े। एक दिन भी पढ़ाई मिस मत करो।

V- बाप की मदद से सूली को कांटा बनाने वाले सदा निश्चिंत और ट्रस्टी भव-----पिछला हिसाब सूली है लेकिन बाप की मदद से वह कांटा बन जाता है। परिस्थितियां आनी जरूर हैं क्योंकि सब कुछ यहाँ ही चुक्तू करना है लेकिन बाप की मदद उन्हें कांटा बना देती है, बड़ी बात को छोटा बना देती है क्योंकि बड़ा बाप साथ है। इसी निश्चय के आधार से सदा निश्चिंत रहो और ट्रस्टी बन मेरे को तेरे में बदली कर हल्के हो जाओ तो सब बोझ एक सेकण्ड में समाप्त हो जायेंगे।

S- शुभ भावना के स्टॉक द्वारा निगेटिव को पॉजिटिव में परिवर्तन करो।