02-02-2019-Hin

"मीठे बच्चे - विदेही बन बाप को याद करो, स्वधर्म में टिको तो त़ाकत मिलेगी, खुशी और तन्दुरूस्ती रहेगी, बैटरी फुल होती जायेगी''

Q- ड्रामा की किस नूँध को जानने के कारण तुम बच्चे सदा अचल रहते हो?

A- तुम जानते हो यह बाम्ब्स आदि जो बने हैं, यह छूटने हैं जरूर। विनाश होगा तब तो हमारी नई दुनिया आयेगी। यह ड्रामा की अनादि नूँध है, मरना तो सबको है। तुम्हें खुशी है कि हम यह पुराना शरीर छोड़ राजाई में जन्म लेंगे। तुम ड्रामा को साक्षी हो देखते हो। इसमें हिलने की बात नहीं, रोने की कोई दरकार नहीं।

D- 1) ज्ञान-योग की मस्ती में रहना है, दिल स़ाफ रखनी है। झरमुई-झगमुई (व्यर्थ चिंतन) में अपना समय नहीं गँवाना है।-----2) हम आत्मा भाई-भाई हैं, अब वापिस घर जाना है - यह अभ्यास पक्का करना है। विदेही बन स्वधर्म में स्थित हो बाप को याद करना है।

V- अकल्याण के संकल्प को समाप्त कर अपकारियों पर उपकार करने वाले ज्ञानी तू आत्मा भव-----कोई रोज़ आपकी ग्लानी करे, अकल्याण करे, गाली दे - तो भी उसके प्रति मन में घृणा भाव न आये, अपकारी पर भी उपकार - यही ज्ञानी तू आत्मा का कर्तव्य है। जैसे आप बच्चों ने बाप को 63 जन्म गाली दी फिर भी बाप ने कल्याणकारी दृष्टि से देखा, तो फालो फादर। ज्ञानी तू आत्मा का अर्थ ही है सर्व के प्रति कल्याण की भावना। अकल्याण संकल्प मात्र भी नहीं हो।

S- मनमनाभव की स्थिति में स्थित रहो तो औरों के मन के भावों को जान जायेंगे।