02-03-2019-Hin

“मीठे बच्चे - डेड साइलेन्स में जाने का अभ्यास करो, बुद्धि बाप की तरफ रहे तो बाप भी तुम्हें अशरीरी बनने के लिए सकाश देंगे''

Q- तुम बच्चों को जब ज्ञान का तीसरा नेत्र मिलता है तो कौन-सा साक्षात्कार हो जाता है?

A- सतयुग आदि से लेकर कलियुग अन्त तक हम कैसे-कैसे पार्ट बजाते हैं - यह सारा साक्षात्कार हो जाता है। तुम सारे विश्व को आदि से अन्त तक जान जाते हो। जानने को ही साक्षात्कार कहा जाता है। अभी तुम समझते हो कि हम दैवीगुणों वाले देवता थे। आसुरी गुण वाले बने। अब फिर दैवी गुणों वाले देवता बन रहे हैं। अभी हम नई दुनिया, नये घर में जायेंगे।

D- 1) अपने सब हिसाब-किताब चुक्तू कर साइलेन्स वर्ल्ड में जाने की तैयारी करनी है। याद के बल से आत्मा को सम्पूर्ण पावन बनाना है।-----2) ज्ञान सागर के ज्ञान को स्वरूप में लाना है। विचार सागर मंथन कर अपना फैंसला आपेही करना है। जीवनमुक्ति में श्रेष्ठ पद प्राप्त करने के लिए दैवीगुण धारण करने हैं।

V- समय के महत्व को जान फास्ट सो फर्स्ट आने वाले तीव्र गति के पुरुषार्थी भव-----अव्यक्त पार्ट में आई हुई आत्माओं को लास्ट सो फास्ट, फास्ट सो फर्स्ट आने का वरदान प्राप्त है। तो समय के महत्व को जान मिले हुए वरदान को स्वरूप में लाओ। यह अव्यक्त पालना सहज ही शक्तिशाली बनाने वाली है इसलिए जितना आगे बढ़ना चाहो, बढ़ सकते हो। बापदादा और निमित्त आत्माओं की सर्व के प्रति सदा आगे उड़ने की दुआयें होने के कारण तीव्र गति के पुरुषार्थ का भाग्य सहज मिला हुआ है।

S- “निराकार सो साकार'' के महामंत्र की स्मृति से निरन्तर योगी बनो।