02-04-2019-Hin

''मीठे बच्चे - अब तुम्हारी सब तरफ से रगें टूट जानी चाहिए क्योंकि घर चलना है, कोई ऐसा विकर्म न हो, जो ब्राह्मण कुल का नाम बदनाम हो''

Q- बाप किन बच्चों को देख-देख बहुत हर्षित होते हैं? कौन-से बच्चे बाप की आखों में समाये हुए हैं?

A- जो बच्चे बहुतों को सुखदाई बनाते, सर्विसएबुल हैं, उन्हें देख-देख बाप भी हर्षित होते हैं। जिन बच्चों की बुद्धि में रहता कि एक बाबा से ही बोलूँ, बाबा से ही बात करूँ.... ऐसे बच्चे बाप की आंखों में समाये रहते हैं। बाबा कहते - मेरी सर्विस करने वाले बच्चे मुझे अति प्रिय हैं। ऐसे बच्चों को मैं याद करता हूँ।

D- 1) किसी के भी नाम रूप में फँसकर कुल कलंकित नहीं बनना है। माया के धोखे में आकर एक-दो को दु:ख नहीं देना है। बाप से समर्थी का वर्सा ले लेना है।-----2) सदा हर्षित रहने के संस्कार यहाँ से ही भरने है। अब पाप आत्माओं से कोई भी लेन-देन नहीं करनी है। बीमारियों आदि से डरना नही है, सब हिसाब-किताब अभी ही चुक्तू करने हैं।

V- परिस्थितियों को शिक्षक समझ उनसे पाठ पढ़ने वाले अनुभवी मूर्त भव-----कोई भी परिस्थिति में घबराने के बजाए थोड़े समय के लिए उसे शिक्षक समझो। परिस्थिति आपको विशेष दो शक्तियों के अनुभवी बनाती है एक सहनशक्ति और दूसरा सामना करने की शक्ति। यह दोनों पाठ पढ़ लो तो अनुभवी बन जायेंगे। जब कहते हो हम तो ट्रस्टी हैं, मेरा कुछ नहीं है तो फिर परिस्थितियों से घबराते क्यों हो। ट्रस्टी माना सब कुछ बाप हवाले कर दिया इसलिए जो होगा वह अच्छा ही होगा इस स्मृति से सदा निश्चिंत, समर्थ स्वरूप में रहो।

S- जिनका मिजाज़ मीठा है वह भूल से भी किसी को दु:ख नहीं दे सकते।