02-05-2022 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - शान्ति तुम्हारे गले का हार है, आत्मा का स्वधर्म है, इसलिए शान्ति के लिए भटकने की दरकार नहीं, तुम अपने स्वधर्म में स्थित हो जाओ''

प्रश्नः-
मनुष्य किसी भी चीज़ को शुद्ध बनाने के लिए कौन सी युक्ति रचते हैं और बाप ने कौन सी युक्ति रची है?

उत्तर:-
मनुष्य किसी भी चीज़ को शुद्ध बनाने के लिए उसे आग में डालते हैं। यज्ञ भी रचते हैं तो उसमें भी आग जलाते हैं। यहाँ भी बाप ने रूद्र यज्ञ रचा है लेकिन यह ज्ञान यज्ञ है, इसमें सबकी आहुति पड़नी है। तुम बच्चे देह सहित सब कुछ इसमें स्वाहा करते हो। तुम्हें योग लगाना है। योग की ही रेस है। इसी से तुम पहले रुद्र के गले का हार बनेंगे फिर विष्णु के गले की माला में पिरोये जायेंगे।

गीत:-
ओम् नमो शिवाए..

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) समय कम है, बहुत गई थोड़ी रही.. इसलिए जो भी श्वांस बची है - बाप की याद में सफल करना है। पुराने पाप के हिसाब-किताब को चुक्तू करना है।

2) शान्ति स्वधर्म में स्थित होने के लिए पवित्र जरूर बनना है। जहाँ पवित्रता है वहाँ शान्ति है। मेरा स्वधर्म ही शान्ति है, मैं शान्ति के सागर बाप की सन्तान हूँ.. यह अनुभव करना है।

वरदान:-
निर्माणता की विशेषता द्वारा सहज सफलता प्राप्त करने वाले सर्व के माननीय भव

सर्व द्वारा मान प्राप्त करने का सहज साधन है - निर्मान बनना। जो आत्मायें स्वयं को सदा निर्माणचित की विशेषता से चलाती रहती हैं वह सहज सफलता को पाती हैं। निर्मान बनना ही स्वमान है। निर्मान बनना झुकना नहीं है लेकिन सर्व को अपनी विशेषता और प्यार से झुकाना है। वर्तमान समय के प्रमाण सदा और सहज सफलता प्राप्त करने का यही मूल आधार है। हर कर्म, सम्बन्ध और सम्पर्क में निर्मान बनने वाले ही विजयी-रत्न बनते हैं।

स्लोगन:-
नॉलेज की शक्ति धारण कर लो तो विघ्न वार करने के बजाए हार खा लेंगे।