02-08-2022 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - पढ़ाई का सिमरण करते रहो तो कभी भी किसी बात में मूँझेंगे नहीं, सदा नशा रहे कि हमें पढ़ाने वाला स्वयं निराकार भगवान है''

प्रश्नः-
इन ज्ञान रत्नों का अविनाशी नशा किन बच्चों को रह सकता है?

उत्तर:-
जो गरीब बच्चे हैं। गरीब बच्चे ही बाप द्वारा पदमा-पदमपति बनते हैं। वह माला में पिरो सकते हैं। साहूकारों को तो अपने विनाशी धन का नशा रहता है। बाबा को इस समय करोड़पति बच्चे नहीं चाहिए। गरीब बच्चों की पाई-पाई से ही स्वर्ग की स्थापना होती है क्योंकि गरीबों को ही साहूकार बनना है।

गीत:-
इस पाप की दुनिया से....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) क्षीरसागर में जाने के लिए एक बाप से ही सच्ची प्रीत रखनी है। एक की ही अव्यभिचारी याद में रहना है और सबको एक बाप की याद दिलानी है।

2) विनाशी धन का नशा नहीं रखना है। ज्ञान धन के नशे में स्थाई रहना है। पढ़ाई से ऊंच पद पाना है।

वरदान:-
बाप की मदद द्वारा उमंग-उत्साह और अथकपन का अनुभव करने वाले कर्मयोगी भव

कर्मयोगी बच्चों को कर्म में बाप का साथ होने के कारण एकस्ट्रा मदद मिलती है। कोई भी काम भल कितना भी मुश्किल हो लेकिन बाप की मदद - उमंग-उत्साह, हिम्मत और अथकपन की शक्ति देने वाली है। जिस कार्य में उमंग-उत्साह होता है वह सफल अवश्य होता है। बाप अपने हाथ से काम नहीं करते लेकिन मदद देने का काम जरूर करते हैं। तो आप और बाप - ऐसी कर्मयोगी स्थिति है तो कभी भी थकावट फील नहीं होगी।

स्लोगन:-
मेरे में ही आकर्षण होती है इसलिए मेरे को तेरे में परिवर्तन करो।