02.10.2020

"मीठे बच्चे - यह पुरूषोत्तम संगमयुग कल्याणकारी युग है, इसमें ही परिवर्तन होता है, तुम कनिष्ट से उत्तम पुरूष बनते हो''

प्रश्नः-

इस ज्ञान मार्ग में कौन सी बात सोचने वा बोलने से कभी भी उन्नति नहीं हो सकती?

उत्तर:-

ड्रामा में होगा तो पुरूषार्थ कर लेंगे। ड्रामा करायेगा तो कर लेंगे। यह सोचने वा बोलने वालों की उन्नति कभी नहीं हो सकती। यह कहना ही रांग है। तुम जानते हो अभी जो हम पुरुषार्थ कर रहे हैं, यह भी ड्रामा में नूँध है। पुरुषार्थ करना ही है।

वरदान:-

संगमयुग की सर्व प्राप्तियों को स्मृति में रख चढ़ती कला का अनुभव करने वाले श्रेष्ठ प्रारब्धी भव

परमात्म मिलन वा परमात्म ज्ञान की विशेषता है - अविनाशी प्राप्तियां होना। ऐसे नहीं कि संगमयुग पुरूषार्थी जीवन है और सतयुगी प्रारब्धी जीवन है। संगमयुग की विशेषता है एक कदम उठाओ और हजार कदम प्रारब्ध में पाओ। तो सिर्फ पुरूषार्थी नहीं लेकिन श्रेष्ठ प्रारब्धी हैं - इस स्वरूप को सदा सामने रखो। प्रारब्ध को देखकर सहज ही चढ़ती कला का अनुभव करेंगे। "पाना था सो पा लिया'' - यह गीत गाओ तो घुटके और झुटके खाने से बच जायेंगे।

स्लोगन:-

ब्राह्मणों का श्वांस हिम्मत है, जिससे कठिन से कठिन कार्य भी आसान हो जाता है।