03-01-2019-Hin

"मीठे बच्चे - अल्फ और बे, बाप और वर्सा याद रहे तो खुशी का पारा चढ़ा रहेगा, यह बहुत सहज सेकेण्ड की बात है''

Q- बेअन्त खुशी किन बच्चों को रहेगी? सदा खुशी का पारा चढ़ा रहे उसका साधन क्या है?

A- जो बच्चे अशरीरी बनने का अभ्यास करते, बाप जो सुनाते हैं उसको अच्छी रीति धारण कर दूसरों को कराते हैं, उन्हें ही बेअन्त खुशी रह सकती है। खुशी का पारा सदा चढ़ा रहे इसके लिए अविनाशी ज्ञान रत्नों का दान करते रहो। बहुतों का कल्याण करो। सदा यह स्मृति रहे कि हम अभी सुख और शान्ति की चोटी पर जा रहे हैं तो खुशी रहेगी।

D- 1) ज्ञान की धारणा करने के लिए पहले अपनी बुद्धि गोल्डन एज की बनाओ। बाप की याद के सिवाए और किसी भी चीज़ में ममत्व न रहे।-----2) कर्मातीत अवस्था को प्राप्त कर घर जाने के लिए अशरीरी बनने का अभ्यास करो। अपनी चाल भी देखो कि किसको दु:ख तो नहीं देते हैं। बाप समान मीठे बने हैं।

V- ब्राह्मण जीवन की नेचरल नेचर द्वारा पत्थर को भी पानी बनाने वाले मास्टर प्रेम के सागर भव-----जैसे दुनिया वाले कहते हैं कि प्यार पत्थर को भी पानी कर देता है, ऐसे आप ब्राह्मणों की नेचुरल नेचर मास्टर प्रेम का सागर है। आपके पास आत्मिक प्यार, परमात्म प्यार की ऐसी शक्ति है, जिससे भिन्न-भिन्न नेचर को परिवर्तन कर सकते हो। जैसे प्यार के सागर ने अपने प्यार स्वरूप की अनादि नेचर से आप बच्चों को अपना बना लिया। ऐसे आप भी मास्टर प्यार के सागर बन विश्व की आत्माओ को सच्चा, नि:स्वार्थ आत्मिक प्यार दो तो उनकी नेचर परिवर्तन हो जायेगी।

S- अपनी विशेषताओं को स्मृति में रख उन्हें सेवा में लगाओ तो उड़ती कला में उड़ते रहेंगे।