03-04-2019-Hin

''मीठे बच्चे - बाप के पास तुम रिफ्रेश होने आते हो, यहाँ तुम्हें दुनियावी वायब्रेशन से दूर सत का सच्चा संग मिलता है''

Q- बाबा बच्चों की उन्नति के लिए सदा कौन-सी एक राय देते हैं?

A- मीठे बच्चे, कभी भी आपस में संसारी झरमुई झगमुई की बातें नहीं करो। कोई सुनाता है तो सुनी-अनसुनी कर दो। अच्छे बच्चे अपने सर्विस की ड्युटी पूरी कर बाबा की याद में मस्त रहते हैं। परन्तु कई बच्चे फालतू व्यर्थ बातें बहुत खुशी से सुनते-सुनाते हैं, इसमें बहुत समय बरबाद जाता है, फिर उन्नति नहीं होती।

D- 1) सर्विस की ड्युटी पूरी कर फिर अपनी मस्ती में रहना है। व्यर्थ की बातें सुननी वा सुनानी नहीं है। एक बाप के महावाक्य ही स्मृति में रखने हैं। उन्हें भूलना नहीं है।-----2) सदा खुशी में रहने के लिए रचता और रचना की नॉलेज बुद्धि में चक्कर लगाती रहे अर्थात् उसका ही सिमरण होता रहे। किसी भी बात में संकल्प न चले, उसके लिए ड्रामा को अच्छी रीति समझकर पार्ट बजाना है।

V- दाता की देन को स्मृति में रख सर्व लगावों से मुक्त रहने वाले, आकर्षणमुक्त भव-----कई बच्चे कहते हैं कि इनसे मेरा कोई लगाव नहीं है, परन्तु इनका यह गुण बहुत अच्छा है या इनमें सेवा की विशेषता बहुत है। लेकिन किसी व्यक्ति या वैभव के तरफ बार-बार संकल्प जाना भी आकर्षण है। किसी की भी विशेषता को देखते, गुणों को वा सेवा को देखते दाता को नहीं भूलो। यह दाता की देन है - यह स्मृति लगावों से मुक्त, आकर्षणमुक्त बना देगी। किसी पर भी प्रभावित नहीं होंगे।

S- ऐसे रूहानी सोशल वर्कर बनो जो भटकती हुई आत्मा को ठिकाना दे दो, भगवान से मिला दो।