03.04.2021

"मीठे बच्चे - तुम बाप की याद में एक्यूरेट रहो तो तुम्हारा चेहरा सदा चमकता हुआ खुशनुम: रहेगा''

प्रश्नः-

याद में बैठने की विधि कौन सी है तथा उससे लाभ क्या-क्या होता है?

उत्तर:-

जब याद में बैठते हो तो बुद्धि से सब धन्धेधोरी आदि की पंचायत को भूल अपने को देही (आत्मा) समझो। देह और देह के सम्बन्धों की बड़ी जाल है, उस जाल को हप करके देह-अभिमान से परे हो जाओ अर्थात् आप मुये मर गई दुनिया। जीते जी सब कुछ भूल एक बाप की याद रहे, यह है अशरीरी अवस्था, इससे आत्मा की कट उतरती जायेगी।

वरदान:-

एक बाप में सारे संसार का अनुभव करने वाले बेहद के वैरागी भव

बेहद के वैरागी वही बन सकते जो बाप को ही अपना संसार समझते हैं। जिनका बाप ही संसार है वह अपने संसार में ही रहेंगे, दूसरे में जायेंगे ही नहीं तो किनारा स्वत: हो जायेगा। संसार में व्यक्ति और वैभव सब आ जाता है। बाप की सम्पत्ति सो अपनी सम्पत्ति - इसी स्मृति में रहने से बेहद के वैरागी हो जायेंगे। कोई को देखते हुए भी नहीं देखेंगे। दिखाई ही नहीं देंगे।

स्लोगन:-

पावरफुल स्थिति का अनुभव करने के लिए एकान्त और रमणीकता का बैलेन्स रखो।