03-09-2021 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - आपस में एक दो को बाप की याद में रहने का इशारा देते, सावधान करते उन्नति को पाते रहो''

प्रश्नः-
बाप समान नॉलेजफुल बनने वाले बच्चों के जीवन की मुख्य धारणा सुनाओ?

उत्तर:-
वह सदैव मुस्कराते रहते, कभी भी किसी बात में उन्हें रोना नहीं आ सकता। कुछ भी होता है नथिंग न्यु। ऐसे जो अभी नॉलेजफुल अर्थात् रोना प्रूफ बनते हैं, कभी किसी बात में अशान्त नहीं होते, उन्हें ही स्वर्ग की बादशाही मिलती है। जिन रोया तिन खोया, रोने वाले अपना पद गँवाते हैं।

गीत:-
तुम्हें पाके हमने........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) एक बाप में ही शुद्ध सच्चा मोह रखना है, उसे ही याद करना है। देहधारियों से ममत्व निकाल देना है। ट्रस्टी होकर सम्भालना है।

2) विकर्माजीत बनना है इसलिए कर्मेन्द्रियों से कोई भी विकर्म न हो, इसका बहुत-बहुत ध्यान रखना है।

वरदान:-
साक्षीपन की सीट द्वारा परेशानी शब्द को समाप्त करने वाले मास्टर त्रिकालदर्शी भव

इस ड्रामा में जो कुछ भी होता है उसमें कल्याण भरा हुआ है, क्यों, क्या का क्वेश्चन समझदार के अन्दर उठ नहीं सकता। नुकसान में भी कल्याण समाया हुआ है, बाप का साथ और हाथ है तो अकल्याण हो नहीं सकता। ऐसे शान की शीट पर रहो तो कभी परेशान नहीं हो सकते। साक्षीपन की शीट परेशानी शब्द को खत्म कर देती है, इसलिए त्रिकालदर्शी बन प्रतिज्ञा करो कि न परेशान होंगे, न परेशान करेंगे।

स्लोगन:-
अपनी सर्व कर्मेन्द्रियों को आर्डर प्रमाण चलाना ही स्वराज्य अधिकारी बनना है।