04-01-2019-Hin

"मीठे बच्चे - अन्तर्मुखी हो अपने कल्याण का ख्याल करो, घूमने-फिरने जाते हो तो एकान्त में विचार सागर मंथन करो, अपने से पूछो - हम सदा हर्षित रहते हैं''

Q- रहमदिल बाप के बच्चों को अपने पर कौन-सा रहम करना चाहिए?

A- जैसे बाप को रहम पड़ता है कि मेरे बच्चे कांटे से फूल बनें, बाप बच्चों को गुल-गुल बनाने की कितनी मेहनत करते हैं तो बच्चों को भी अपने ऊपर तरस आना चाहिए कि हम बाबा को बुलाते हैं - हे पतित-पावन आओ, फूल बनाओ, अब वह आये हैं तो क्या हम फूल नहीं बनेंगे! रहम पड़े तो देही-अभिमानी रहें। बाप जो सुनाते हैं उसको धारण करें।

D- 1) सदा स्मृति में रखना है कि हम बेहद बाप के स्टूडेन्ट हैं, भगवान् हमें पढ़ाते हैं, इसलिए अच्छी तरह पढ़कर बाप का नाम बाला करना है। अपनी चलन बड़ी रॉयल रखनी है।-----2) बाप समान रहमदिल बन कांटे से फूल बनना और दूसरों को फूल बनाना है। अन्तर्मुखी बन अपने वा दूसरों के कल्याण का चिन्तन करना है।

V- विकारों रूपी जहरीले सांपों को गले की माला बनाने वाले शंकर समान तपस्वीमूर्त भव-----यह पांच विकार जो लोगों के लिए जहरीले सांप हैं, यह सांप आप योगी वा प्रयोगी आत्मा के गले की माला बन जाते हैं। यह आप ब्राह्मणों वा ब्रह्मा बाप के अशरीरी तपस्वी शंकर स्वरूप का यादगार आज तक भी पूजा जाता है। दूसरा - यह सांप खुशी में नांचने की स्टेज बन जाते हैं - यह स्थिति स्टेज के रूप में दिखाते हैं। तो जब विकारों पर ऐसी विजय हो तब कहेंगे तपस्वीमूर्त, प्रयोगी आत्मा।

S- जिनका स्वभाव मीठा, शान्तचित है उस पर क्रोध का भूत वार नहीं कर सकता।