04-02-2020-Hin

“मीठे बच्चे - तुमने अब तक जो कुछ पढ़ा है उसे भूल जाओ, जीते जी मरना माना सब कुछ भूलना, पिछला कुछ भी याद न आये”

Q- जो पूरा जीते जी मरे हुए नहीं हैं उनकी निशानी क्या होगी?

A- वह बाप से भी आरग्यु करते रहेंगे। शास्त्रों का मिसाल देते रहेंगे। जो पूरा मर गये वह कहेंगे बाबा जो सुनाते वही सच है। हमने आधाकल्प जो सुना वह झूठ ही था इसलिए अब उसे मुख पर भी न लायें। बाप ने कहा है हियर नो ईविल.......

D- 1) तीव्र पुरूषार्थी बनने के लिए पढ़ाई का शौक रखना है। सवेरे-सवेरे उठकर पढ़ाई पढ़नी है। साक्षात्कार की आश नहीं रखनी है, इसमें भी टाइम वेस्ट जाता है।-----2) शान्तिधाम और सुखधाम को याद करना है, इस दु:खधाम को भूल जाना है। किसी से भी आरग्यु नहीं करनी है, प्रेम से मुक्ति और जीवनमुक्तिधाम का रास्ता बताना है।

V- निमित्त भाव द्वारा सेवा में सफलता प्राप्त करने वाले श्रेष्ठ सेवाधारी भव-----निमित्त भाव-सेवा में स्वत: सफलता दिलाता है। निमित्त भाव नहीं तो सफलता नहीं। श्रेष्ठ सेवाधारी अर्थात् हर कदम बाप के कदम पर रखने वाले। हर कदम श्रेष्ठ मत पर श्रेष्ठ बनाने वाले। जितना सेवा में, स्व में व्यर्थ समाप्त हो जाता है उतना ही समर्थ बनते हैं और समर्थ आत्मा हर कदम में सफलता प्राप्त करती है। श्रेष्ठ सेवाधारी वह है जो स्वयं भी सदा उमंग उत्साह में रहे और औरों को भी उमंग उत्साह दिलाये।

S- ईश्वरीय सेवा में स्वयं को आफर करो तो आफरीन मिलती रहेगी।