04.11.2020

"मीठे बच्चे - तुम्हें सदैव याद की फाँसी पर चढ़े रहना है, याद से ही आत्मा सच्चा सोना बनेगी''

प्रश्नः-

कौन-सा बल क्रिमिनल आंखों को फौरन ही बदल देता है?

उत्तर:-

ज्ञान के तीसरे नेत्र का बल जब आत्मा में आ जाता है तो क्रिमिनलपन समाप्त हो जाता है। बाप की श्रीमत है-बच्चे, तुम सब आपस में भाई-भाई हो, भाई-बहन हो, तुम्हारी आंखें कभी भी क्रिमिनल हो नहीं सकती। तुम सदैव याद की मस्ती में रहो। वाह तकदीर वाह! हमें भगवान पढ़ाते हैं। ऐसे विचार करो तो मस्ती चढ़ी रहेगी।

वरदान:-

सेवा करते उपराम स्थिति में रहने वाले योगयुक्त, युक्तियुक्त सेवाधारी भव

जो योगयुक्त, युक्तियुक्त सेवाधारी हैं वह सेवा करते भी सदा उपराम रहते हैं। ऐसे नहीं सेवा ज्यादा है इसलिए अशरीरी नहीं बन सकते। लेकिन याद रहे कि मेरी सेवा नहीं, बाप ने दी है तो निर्बन्धन रहेंगे। ट्रस्टी हूँ, बंधनमुक्त हूँ ऐसी प्रैक्टिस करो। अति के समय अन्त की स्टेज, कर्मातीत अवस्था का अभ्यास करो। जैसे बीच-बीच में संकल्पों की ट्रैफिक को कन्ट्रोल करते हो ऐसे अति के समय अन्त की स्टेज का अनुभव करो तब अन्त के समय पास विद आनर बन सकेंगे।

स्लोगन:-

शुभ भावना कारण को निवारण में परिवर्तन कर देती है।