05-02-2019-Hin

"मीठे बच्चे - बाप आये हैं काँटों को फूल बनाने, बाप का प्यार काँटों से भी है, तो फूलों से भी है। काँटों को ही फूल बनाने की मेहनत करते हैं''

Q- जिन बच्चों में ज्ञान की धारणा होगी उनकी निशानी सुनाओ?

A- वह कमाल करके दिखायेंगे। वह अपना और दूसरों का कल्याण करने के बिगर रह नहीं सकते। तीर लग गया तो नष्टोमोहा बन रूहानी सर्विस में लग जायेंगे। उनकी अवस्था एकरस अचल-अडोल होगी। कभी कोई बेसमझी का काम नहीं करेंगे। किसी को भी दु:ख नहीं देंगे। अवगुण रूपी काँटों को निकालते जायेंगे।

D- 1) विनाशी शरीर से दिल नहीं लगानी है। मोहजीत बनना है, प्रतिज्ञा करो कि कोई भी शरीर छोड़े, हम कभी रोयेंगे नहीं।-----2) बाप समान मीठा बनना है, सबको सुख देना है। किसको दु:ख नहीं देना है। काँटों को फूल बनाने की सेवा करनी है। अपना और दूसरों का कल्याण करना है।

V- देह-भान से न्यारे बन परमात्म प्यार का अनुभव करने वाले कमल आसनधारी भव-----कमल आसन ब्राह्मण आत्माओं के श्रेष्ठ स्थिति की निशानी है। ऐसी कमल आसनधारी आत्मायें इस देहभान से स्वत: न्यारी रहती हैं। उन्हें शरीर का भान अपनी तरफ आकर्षित नहीं करता। जैसे ब्रह्मा बाप को चलते फिरते फरिश्ता रूप वा देवता रूप सदा स्मृति में रहा। ऐसे नेचुरल देही-अभिमानी स्थिति सदा रहे इसको कहते हैं देह-भान से न्यारे। ऐसे देह-भान से न्यारे रहने वाले ही परमात्म प्यारे बन जाते हैं।

S- आपकी विशेषतायें वा गुण प्रभु प्रसाद हैं, उन्हें मेरा मानना ही देह-अभिमान है।