05-05-2022 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - तुम बाप की श्रीमत पर चलो तो तुम्हें कोई भी दु:ख दे नहीं सकता, दु:ख तकलीफ देने वाला रावण है जो तुम्हारे राज्य में होता नहीं''

प्रश्नः-
इस ज्ञान यज्ञ में तुम बच्चे कौन सी आहुति देते हो?

उत्तर:-
इस ज्ञान यज्ञ में तुम कोई तिल जौं की आहुति नहीं देते, इसमें तुम्हें देह सहित जो कुछ भी है वह सब आहुति देनी है अर्थात् बुद्धि से सब भुला देना है। इस यज्ञ की सम्भाल पवित्र रहने वाले ब्राह्मण ही कर सकते हैं। जो पवित्र ब्राह्मण बनते वही फिर ब्राह्मण सो देवता बनते हैं।

गीत:-
तुम्हें पाके हमने जहान...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अविनाशी ज्ञान रत्नों की धारणा कर शंख-ध्वनि करनी है। सबको यह ज्ञान रत्न देने हैं।

2) सत्य और असत्य को समझकर सत्य मत पर चलना है। कोई भी बेकायदे कर्म नहीं करना है।

वरदान:-
बुद्धि को बिजी रखने की विधि द्वारा व्यर्थ को समाप्त करने वाले सदा समर्थ भव

सदा समर्थ अर्थात् शक्तिशाली वही बनता है जो बुद्धि को बिजी रखने की विधि को अपनाता है। व्यर्थ को समाप्त कर समर्थ बनने का सहज साधन ही है - सदा बिजी रहना इसलिए रोज़ सवेरे जैसे स्थूल दिनचर्या बनाते हो ऐसे अपनी बुद्धि को बिजी रखने का टाइम-टेबल बनाओ कि इस समय बुद्धि में इस समर्थ संकल्प से व्यर्थ को खत्म करेंगे। बिजी रहेंगे तो माया दूर से ही वापस चली जायेगी।

स्लोगन:-
दु:खों की दुनिया को भूलना है तो परमात्म प्यार में सदा खोये रहो।