05.10.2020

"मीठे बच्चे - एकान्त में बैठ अब ऐसा अभ्यास करो जो अनुभव हो मैं शरीर से भिन्न आत्मा हूँ, इसको ही जीते जी मरना कहा जाता है''

प्रश्नः-

एकान्त का अर्थ क्या है? एकान्त में बैठ तुमको कौन-सा अनुभव करना है?

उत्तर:-

एकान्त का अर्थ है एक की याद में इस शरीर का अन्त हो अर्थात् एकान्त में बैठ ऐसा अनुभव करो कि मैं आत्मा इस शरीर (चमड़ी) को छोड़ बाप के पास जाती हूँ। कोई भी याद न रहे। बैठे-बैठे अशरीरी हो जाओ। जैसेकि हम इस शरीर से मर गये। बस हम आत्मा हैं, शिव बाबा के बच्चे हैं, इस प्रैक्टिस से देह भान टूटता जायेगा।

वरदान:-

भिन्नता को मिटाकर एकता लाने वाले सच्चे सेवाधारी भव

ब्राह्मण परिवार की विशेषता है अनेक होते भी एक। आपकी एकता द्वारा ही सारे विश्व में एक धर्म, एक राज्य की स्थापना होती है इसलिए विशेष अटेन्शन देकर भिन्नता को मिटाओ और एकता को लाओ तब कहेंगे सच्चे सेवाधारी। सेवाधारी स्वयं प्रति नहीं लेकिन सेवा प्रति होते हैं। स्वयं का सब कुछ सेवा प्रति स्वाहा करते हैं, जैसे साकार बाप ने सेवा में हड्डियां भी स्वाहा की ऐसे आपकी हर कर्मेन्द्रिय द्वारा सेवा होती रहे।

स्लोगन:-

परमात्म प्यार में खो जाओ तो दु:खों की दुनिया भूल जायेगी।