06-02-2019-Hin

"मीठे बच्चे - अब अशरीरी होकर घर जाना है इसलिए जब किसी से बात करते हो तो आत्मा भाई-भाई समझ बात करो, देही-अभिमानी रहने की मेहनत करो''

Q- भविष्य राज तिलक प्राप्त करने का आधार क्या है?

A- पढ़ाई। हरेक को पढ़कर राज तिलक लेना है। बाप की है पढ़ाने की ड्युटी, इसमें आशीर्वाद की बात नहीं। पूरा निश्चय है तो श्रीमत पर चलते चलो। ग़फलत नहीं करनी है। अगर मतभेद में आकर पढ़ाई छोड़ी तो नापास हो जायेंगे, इसलिए बाबा कहते - मीठे बच्चे, अपने ऊपर रहम करो। आशीर्वाद मांगनी नहीं है, पढ़ाई पर ध्यान देना है।

D- 1) प्रवृत्ति में रहते आपस में रेस करनी है। परन्तु अगर किसी कारण से एक पहिया ढीला पड़ जाता है तो उसके पीछे ठहर नहीं जाना है। स्वयं को राजतिलक देने के लायक बनाना है।-----2) शिव जयन्ती बड़ी धूम-धाम से मनानी है क्योंकि शिवबाबा जो ज्ञान रत्न देते हैं, उससे ही तुम नई दुनिया में मालामाल बनेंगे। तुम्हारे सब भण्डारे भरपूर हो जायेंगे।

V- सर्व पदार्थो की आसक्तियों से न्यारे अनासक्त, प्रकृतिजीत भव-----अगर कोई भी पदार्थ कर्मेन्द्रियों को विचलित करता है अर्थात् आसक्ति का भाव उत्पन्न होता है तो भी न्यारे नहीं बन सकेंगे। इच्छायें ही आसक्तियों का रूप हैं। कई कहते हैं इच्छा नहीं है लेकिन अच्छा लगता है। तो यह भी सूक्ष्म आसक्ति है - इसकी महीन रूप से चेकिंग करो कि यह पदार्थ अर्थात् अल्पकाल सुख के साधन आकर्षित तो नहीं करते हैं? यह पदार्थ प्रकृति के साधन हैं, जब इनसे अनासक्त अर्थात् न्यारे बनेंगे तब प्रकृतिजीत बनेंगे।

S- मेरे-मेरे के झमेलों को छोड़ बेहद में रहो तब कहेंगे विश्व कल्याणकारी।