06-02-2020-Hin

“मीठे बच्चे - अब विकारों का दान दो तो ग्रहण उतर जाये और यह तमोप्रधान दुनिया सतोप्रधान बनें”

Q- तुम बच्चों को किस बात से कभी भी तंग नहीं होना चाहिए?

A- तुम्हें अपनी लाइफ (जीवन) से कभी भी तंग नहीं होना चाहिए क्योंकि यह हीरे जैसा जन्म गाया हुआ है, इनकी सम्भाल भी करनी है, तन्दुरूस्त होंगे तो नॉलेज सुनते रहेंगे। यहाँ जितना दिन जियेंगे, कमाई होती रहेगी, हिसाब-किताब चुक्तू होता रहेगा।

D- 1) एक बाप की अव्यभिचारी याद में रह देह-भान को खत्म करना है। अपनी कर्मातीत अवस्था बनाने का पुरूषार्थ करना है। इस शरीर में रहते अविनाशी कमाई जमा करनी है।-----2) ज्ञानी तू आत्मा बन औरों की सर्विस करनी है, बाप से जो सुना है उसे धारण कर दूसरों को सुनाना है। 5 विकारों का दान दे राहू के ग्रहण से मुक्त होना है।

V- मन्सा शक्ति के अनुभव द्वारा विशाल कार्य में सदा सहयोगी भव-----प्रकृति को, तमोगुणी आत्माओं के वायब्रेशन को परिवर्तन करना तथा खूने नाहेक वायुमण्डल, वायब्रेशन में स्वयं को सेफ रखना, अन्य आत्माओं को सहयोग देना, नई सृष्टि में नई रचना का योगबल से प्रारम्भ करना-इन सब विशाल कार्यों के लिए मन्सा शक्ति की आवश्यकता है। मन्सा शक्ति द्वारा ही स्वयं की अन्त सुहानी होगी। मन्सा शक्ति अर्थात् श्रेष्ठ संकल्प शक्ति, एक के साथ लाइन क्लीयर-अभी इसके अनुभवी बनो तब बेहद के कार्य में सहयोगी बन बेहद विश्व के राज्य अधिकारी बनेंगे।

S- निर्भयता और नम्रता ही योगी व ज्ञानी आत्मा का स्वरूप है।