06-03-2019-Hin

“मीठे बच्चे - ज्ञान सागर बाप तुम्हें रत्नों की थालियां भर-भर कर देते हैं, जितना चाहे अपनी झोली भरो, सब फिकरातों से फ़ारिग हो जाओ''

Q- ज्ञान मार्ग की कौन-सी बात भक्ति मार्ग में भी पसन्द करते हैं?

A- स्वच्छता। ज्ञान मार्ग में तुम बच्चे स्वच्छ बनते हो। बाप तुम्हारे मैले कपड़ों को स्वच्छ बनाने आये हैं, आत्मा जब स्वच्छ अर्थात् पावन बन जाती है तब घर में जाने के, उड़ने के पंख लग जाते हैं। भक्ति में भी स्वच्छता को बहुत पसन्द करते हैं। स्वच्छ बनने के लिए गंगा में जाकर स्नान करते, लेकिन पानी से आत्मा स्वच्छ नहीं बन सकती।

D- 1) कल्याणकारी बाप के हम बच्चे हैं इसलिए अपना और सर्व का कल्याण करना है। कोई ऐसा कर्म न हो जो की कमाई खत्म हो जाए इसमें खबरदार रहना है।-----2) पढ़ाई अच्छी तरह से पढ़कर ज्ञान रत्नों से अपनी झोली भरपूर करनी है। स्कॉलरशिप लेने का पुरुषार्थ करना है। बाप समान फिक्र से फ़ारिग, निश्चिन्त रहना है।

V- ब्राह्मण जन्म की विशेषता को नेचरल नेचर बनाने वाले सहज पुरुषार्थी भव-----ब्राह्मण जन्म भी विशेष, ब्राह्मण धर्म और कर्म भी विशेष अर्थात् सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि ब्राह्मण कर्म में फालो साकार ब्रह्मा बाप को करते हैं। तो ब्राह्मणों की नेचर ही विशेष नेचर है, साधारण वा मायावी नेचर ब्राह्मणों की नेचर नहीं। सिर्फ यही स्मृति स्वरूप में रहे कि मैं विशेष आत्मा हूँ, यह नेचर जब नेचरल हो जायेगी तब बाप समान बनना सहज अनुभव करेंगे। स्मृति स्वरूप सो समर्थी स्वरूप बन जायेंगे - यही सहज पुरुषार्थ है।

S- पवित्रता और शान्ति की लाईट चारों ओर फैलाने वाले ही लाइट हाउस हैं।