06.04.2021

"मीठे बच्चे - अब वापिस घर जाना है, इसलिए देह-भान को भूल अपने को अशरीरी आत्मा समझो, सबसे ममत्व मिटा दो''

प्रश्नः-

संगमयुग पर तुम बच्चे बाप से कौन सा अक्ल सीखते हो?

उत्तर:-

तमोप्रधान से सतोप्रधान कैसे बनें, अपनी तकदीर ऊंची कैसे बनायें, यह अक्ल अभी ही तुम सीखते हो। जो जितना योगयुक्त और ज्ञान युक्त बने हैं, उनकी उतनी उन्नति होती रहती है। उन्नति करने वाले बच्चे कभी भी छिप नहीं सकते। बाप हर एक बच्चे की एक्ट से समझते हैं कि कौन-सा बच्चा अपनी ऊंची तकदीर बना रहा है।

वरदान:-

सहयोग द्वारा स्वयं को सहज योगी बनाने वाले निरन्तर योगी भव

संगमयुग पर बाप का सहयोगी बन जाना - यही सहजयोगी बनने की विधि है। जिनका हर संकल्प, शब्द और कर्म बाप की वा अपने राज्य की स्थापना के कर्तव्य में सहयोगी रहने का है, उसको ज्ञानी, योगी तू आत्मा निरन्तर सच्चा सेवाधारी कहा जाता है। मन से नहीं तो तन से, तन से नहीं तो धन से, धन से भी नहीं तो जिसमें सहयोगी बन सकते हो उसमें सहयोगी बनो तो यह भी योग है। जब हो ही बाप के, तो बाप और आप - तीसरा कोई न हो - इससे निरन्तर योगी बन जायेंगे।

स्लोगन:-

संगम पर सहन करना अर्थात् मरना ही स्वर्ग का राज्य लेना है।