06.09.2020

वरदान:-

देह भान का त्याग कर निक्रोधी बनने वाले निर्मानचित्त भव

जो बच्चे देह भान का त्याग करते हैं उन्हें कभी भी क्रोध नहीं आ सकता क्योंकि क्रोध आने के दो कारण होते हैं। एक - जब कोई झूठी बात कहता है और दूसरा जब कोई ग्लानी करता है। यही दो बातें क्रोध को जन्म देती हैं। ऐसी परिस्थिति में निर्मानचित्त के वरदान द्वारा अपकारी पर भी उपकार करो, गाली देने वाले को गले लगाओ, निंदा करने वाले को सच्चा मित्र मानो - तब कहेंगे कमाल। जब ऐसा परिवर्तन दिखाओ तब विश्व के आगे प्रसिद्ध होंगे

स्लोगन:-

मौज़ का अनुभव करने के लिए माया की अधीनता को छोड़ स्वतंत्र बनो।