06-09-2021 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - पतित-पावन बाप की श्रीमत पर तुम पावन बनते हो इसलिए तुम्हें पावन दुनिया की राजाई मिलती, अपनी मत पर पावन बनने वालों को कोई प्राप्ति नहीं''

प्रश्नः-
बच्चों को सर्विस पर विशेष किस बात का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर:-
जब सर्विस में जाते हो तो कभी छोटी मोटी बात में एक दूसरे से रूठो मत अर्थात् नाराज़ न हो। अगर आपस में लूनपानी होते, बात नहीं करते तो डिससर्विस के निमित्त बन जाते। कई बच्चे तो बाप से भी रूठ जाते हैं। उल्टे कर्म करने लग पड़ते हैं। फिर ऐसे बच्चों की एडाप्शन ही रद्द हो जाती है।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बुद्धि रूपी झोली में अविनाशी ज्ञान रत्न भरपूर कर फिर दान करना है। दान करने से ही खुशी रहेगी। ज्ञान धन बढ़ता जायेगा।

2) कभी भी आपस में बिगड़कर लूनपानी नहीं होना है। बहुत प्यार से बाप को याद करना है और मुरली सुननी है। तवाई नहीं बनना है।

वरदान:-
सदा पुण्य का खाता जमा करने और कराने वाले मास्टर शिक्षक भव

हम मास्टर शिक्षक हैं, मास्टर कहने से बाप स्वत: याद आता है। बनाने वाले की याद आने से स्वयं निमित्त हूँ - यह स्वत: स्मृति में आ जाता है। विशेष स्मृति रहे कि हम पुण्य आत्मा हैं, पुण्य का खाता जमा करना और कराना - यही विशेष सेवा है। पुण्य आत्मा कभी पाप का एक परसेन्ट संकल्प मात्र भी नहीं कर सकती। मास्टर शिक्षक माना सदा पुण्य का खाता जमा करने और कराने वाले, बाप समान।

स्लोगन:-
संगठन के महत्व को जानने वाले संगठन में ही स्वयं की सेफ्टी का अनुभव करते हैं।