06.10.2020

"मीठे बच्चे - जैसे बाप भविष्य 21 जन्मों के लिए सुख देते हैं वैसे आप बच्चे भी बाप के मदद-गार बनो, प्रीत-बुद्धि बनो, दु:ख देने का कभी ख्याल भी न आये''

प्रश्नः-

तुम रूप-बसन्त बच्चों का कर्तव्य क्या है? तुम्हें बाप की कौन-सी शिक्षायें मिली हुई हैं?

उत्तर:-

तुम रूप-बसन्त बच्चों का कर्तव्य है मुख से सदैव रत्न निकालना, तुम्हारे मुख से कभी पत्थर नहीं निकलने चाहिए। सर्व बच्चों प्रति बाप की शिक्षा है कि बच्चे 1. आपस में कभी एक-दो को तंग नहीं करना, गुस्सा नहीं करना, यह आसुरी मनुष्यों का काम है। 2. मन्सा में भी किसी को दु:ख देने का ख्याल न आये। 3. निंदा-स्तुति, मान-अपमान सब कुछ सहन करना। अगर कोई कुछ बोलता है तो शान्त रहना। हाथ में लॉ नहीं उठाना।

वरदान:-

मन्सा संकल्प वा वृत्ति द्वारा श्रेष्ठ वायब्रेशन्स की खुशबू फैलाने वाले शिव शक्ति कम्बाइन्ड भव

जैसे आजकल स्थूल खुशबू के साधनों से गुलाब, चंदन व भिन्न-भिन्न प्रकार की खुशबू फैलाते हैं ऐसे आप शिव शक्ति कम्बाइन्ड बन मन्सा संकल्प व वृत्ति द्वारा सुख-शान्ति, प्रेम, आनंद की खुशबू फैलाओ। रोज़ अमृतवेले भिन्न-भिन्न श्रेष्ठ वायब्रेशन के फाउन्टेन के माफिक आत्माओं के ऊपर गुलावाशी डालो। सिर्फ संकल्प का आटोमेटिक स्विच आन करो तो विश्व में जो अशुद्ध वृत्तियों की बदबू है वह समाप्त हो जायेगी।

स्लोगन:-

सुखदाता द्वारा सुख का भण्डार प्राप्त होना - यही उनके प्यार की निशानी है।