06-11-2019-Hin

“मीठे बच्चे - अपनी जांच करो कि कितना समय बाप की स्मृति रहती है, क्योंकि स्मृति में है ही फायदा, विस्मृति में है घाटा”

Q- इस पाप आत्माओं की दुनिया में कौन-सी बात बिल्कुल असम्भव है और क्यों?

A- यहाँ कोई कहे हम पुण्य आत्मा हैं, यह बिल्कुल असम्भव है क्योंकि दुनिया ही कलियुगी तमोप्रधान है। मनुष्य जिसको पुण्य का काम समझते हैं वह भी पाप हो जाता है क्योंकि हर कर्म विकारों के वश हो करते हैं।

D- 1) अपनी बेहद की डायरी में चार्ट नोट करना है कि हमने याद में रहकर कितना फायदा बढ़ाया? घाटा तो नहीं पड़ा? याद के समय बुद्धि कहाँ-कहाँ गई?-----2) इस जन्म में छोटेपन से हमसे कौन-कौन से उल्टे कर्म अथवा पाप हुए हैं, वह नोट करना है। जिस बात में दिल खाती है उसे बाप को सुनाकर हल्का हो जाना है। अब कोई भी पाप का काम नहीं करना है।

V- अच्छाई पर प्रभावित होने के बजाए उसे स्वयं में धारण करने वाले परमात्म स्नेही भव-----अगर परमात्म स्नेही बनना है तो बॉडीकानसेस की रूकावटों को चेक करो। कई बच्चे कहते हैं यह बहुत अच्छा या अच्छी है इसलिए थोड़ा रहम आता है...कोई का किसी के शरीर से लगाव होता तो कोई का किसी के गुणों वा विशेषताओं से। लेकिन वह विशेषता वा गुण देने वाला कौन? कोई अच्छा है तो अच्छाई को धारण भले करो लेकिन अच्छाई में प्रभावित नहीं हो जाओ। न्यारे और बाप के प्यारे बनो। ऐसे प्यारे अर्थात् परमात्म स्नेही बच्चे सदा सेफ रहते हैं।

S- साइलेन्स की शक्ति इमर्ज करो तो सेवा की गति फास्ट हो जायेगी।