06.11.2020

"मीठे बच्चे - तुम अभी गॉडली सर्विस पर हो, तुम्हें सबको सुख का रास्ता बताना है, स्कालरशिप लेने का पुरूषार्थ करना है''

प्रश्नः-

तुम बच्चों की बुद्धि में जब ज्ञान की अच्छी धारणा हो जाती है तो कौन-सा डर निकल जाता है?

उत्तर:-

भक्ति में जो डर रहता कि गुरू हमें श्राप न दे देवे, यह डर ज्ञान में आने से, ज्ञान की धारणा करने से निकल जाता है क्योंकि ज्ञान मार्ग में श्राप कोई दे न सके। रावण श्राप देता है, बाप वर्सा देते हैं। रिद्धि-सिद्धि सीखने वाले ऐसा तंग करने का, दु:ख देने का काम करते हैं, ज्ञान में तो तुम बच्चे सबको सुख पहुँचाते हो।

वरदान:-

सर्व खजानों की इकॉनामी का बजट बनाने वाले महीन पुरूषार्थी भव

जैसे लौकिक रीति में यदि इकॉनामी वाला घर न हो तो ठीक रीति से नहीं चल सकता। ऐसे यदि निमित्त बने हुए बच्चे इकॉनामी वाले नहीं हैं तो सेन्टर ठीक नहीं चलता। वह हुई हद की प्रवृत्ति, यह है बेहद की प्रवृत्ति। तो चेक करना चाहिए कि संकल्प, बोल और शक्तियों में क्या-क्या एक्स्ट्रा खर्च किया? जो सर्व खजानों की इकॉनामी का बजट बनाकर उसी अनु-सार चलते हैं उन्हें ही महीन पुरूषार्थी कहा जाता है। उनके संकल्प, बोल, कर्म व ज्ञान की शक्तियां कुछ भी व्यर्थ नहीं जा सकती।

स्लोगन:-

स्नेह के खजाने से मालामाल बन सबको स्नेह दो और स्नेह लो।