07-01-2019-Hin

"मीठे बच्चे - मनुष्य शरीर की उन्नति का प्रबन्ध रचते, आत्मा की उन्नति वा चढ़ती का साधन बाप ही बतलाते हैं - यह बाप की ही रेसपान्सिबिल्टी है''

Q- सदा बच्चों की उन्नति होती रहे उसके लिए बाप कौन-कौन सी श्रीमत देते हैं?

A- बच्चे, अपनी उन्नति के लिए 1- सदा याद की यात्रा पर रहो। याद से ही आत्मा की जंक निकलेगी। 2- कभी भी बीती को याद नहीं करो और आगे के लिए कोई आश न रखो। 3- शरीर निर्वाह के लिए कर्म भले करो लेकिन जो भी टाइम मिले वह वेस्ट नहीं करो, बाप की याद में टाइम सफल करो। 4- कम से कम 8 घण्टा ईश्वरीय सेवा करो तो तुम्हारी उन्नति होती रहेगी।

D- 1) कम से कम 8 घण्टा ईश्वरीय गवर्मेंन्ट की सर्विस कर अपना टाइम सफल करना है। बाप जैसा गुणवान बनना है।-----2) जो बीता उसे याद नहीं करना है। बीती को बीती कर सदैव हर्षित रहना है। ड्रामा पर अडोल रहना है।

V- निश्चित विजय के नशे में रह बाप की पदमगुणा मदद प्राप्त करने वाले मायाजीत भव-----बाप की पदमगुणा मदद के पात्र बच्चे माया के वार को चैलेन्ज करते हैं कि आपका काम है आना और हमारा काम है विजय प्राप्त करना। वे माया के शेर रूप को चींटी समझते हैं क्योंकि जानते हैं कि यह माया का राज्य अब समाप्त होना है, हम अनेक बार के विजयी आत्माओं की विजय 100 परसेन्ट निश्चित है। यह निश्चित का नशा बाप की पदमगुणा मदद का अधिकार प्राप्त कराता है। इस नशे से सहज ही मायाजीत बन जाते हो।

S- संकल्प शक्ति को जमा कर स्व प्रति वा विश्व प्रति इसका प्रयोग करो।