07-02-2019-Hin

"मीठे बच्चे - पावन बनने के लिए एक है याद का बल, दूसरा है सजाओं का बल, तुम्हें याद के बल से पावन बन ऊंच पद पाना है''

Q- बाप रूहानी सर्जन है, वह तुम्हें कौन-सा धीरज देने आये हैं?

A- जैसे वह सर्जन रोगी को धीरज देते हैं कि अभी बीमारी ठीक हो जायेगी, ऐसे रूहानी सर्जन भी तुम बच्चों को धीरज देते हैं - बच्चे, तुम माया की बीमारी से घबराओ नहीं, सर्जन दवा देते हैं तो यह बीमारियां सब बाहर निकलेंगी, जो ख्यालात अज्ञान में भी नहीं आये होंगे, आयेंगे। लेकिन तुम्हें सब सहन करना है। थोड़ा मेहनत करो, तुम्हारे अब सुख के दिन आये कि आये।

D- 1) देवताओं जैसे गुण स्वयं में धारण करने हैं, अन्दर जो भी ईविल संस्कार हैं, क्रोध आदि की आदत है, उसे छोड़ना है। विकर्माजीत बनना है इसलिए अब कोई भी विकर्म नहीं करना है।-----2) हीरे समान श्रेष्ठ बनने के लिए ज्ञान अमृत पीना और पिलाना है। काम विकार पर सम्पूर्ण विजय पानी है। स्वयं को सतोप्रधान बनाना है। याद के बल से सब पुराने हिसाब-किताब चुक्तू करने हैं।

V- सहज योग की साधना द्वारा साधनों पर विजय प्राप्त करने वाले प्रयोगी आत्मा भव-----साधनों के होते, साधनों को प्रयोग में लाते योग की स्थिति डगमग न हो। योगी बन प्रयोग करना इसको कहते हैं न्यारा। होते हुए निमित्त मात्र, अनासक्त रूप से प्रयोग करो। अगर इच्छा होगी तो वह इच्छा अच्छा बनने नहीं देगी। मेहनत करने में ही समय बीत जायेगा। उस समय आप साधना में रहने का प्रयत्न करेंगे और साधन अपनी तरफ आकर्षित करेंगे इसलिए प्रयोगी आत्मा बन सहजयोग की साधना द्वारा साधनों के ऊपर अर्थात् प्रकृति पर विजयी बनो।

S- स्वयं सन्तुष्ट रह, सबको सन्तुष्ट करना ही सन्तुष्टमणि बनना है।