07.02.2021

वरदान:-

स्वयं के आराम का भी त्याग कर सेवा करने वाले सदा सन्तुष्ट, सदा हर्षित भव

सेवाधारी स्वयं के रात-दिन के आराम को भी त्यागकर सेवा में ही आराम महसूस करते हैं, उनके सम्पर्क में रहने वाले वा सम्बन्ध में आने वाले समीपता का ऐसे अनुभव करते हैं जैसे शीतलता वा शक्ति, शान्ति के झरने के नीचे बैठे हैं। श्रेष्ठ चरित्रवान सेवाधारी कामधेनु बन सदाकाल के लिए सर्व की मनोकामनायें पूर्ण कर देते हैं। ऐसे सेवाधारी को सदा हर्षित और सदा सन्तुष्ट रहने का वरदान स्वत: प्राप्त हो जाता है।

स्लोगन:-

ज्ञान स्वरूप बनना है तो हर समय स्टडी पर अटेन्शन रखो, बाप और पढ़ाई से समान प्यार हो।