07-03-2019-Hin

“मीठे बच्चे - ज्ञान की डिपार्टमेन्ट अलग है, योग की अलग है। योग से आत्मा सतोप्रधान बनती है, योग के लिए एकान्त की जरूरत है''

Q- स्थाई याद में रहने का आधार क्या है?

A- तुम्हारे पास जो कुछ भी है, उसे भूल जाओ। शरीर भी याद न रहे। सब ईश्वरीय सेवा में लगा दो। यही है मेहनत। इस कुर्बानी से याद स्थाई रह सकती है। तुम बच्चे प्यार से बाप को याद करेंगे तो याद से याद मिलेगी। बाबा भी करेन्ट देंगे। करेन्ट से ही आयु बढ़ती है। आत्मा एवरहेल्दी बन सकती है।

D- 1) बाप से सर्च-लाइट लेने के लिए सवेरे-सवेरे उठ बाप की याद में बैठना है। रात्रि को जागकर एक-दो को करेन्ट दे मददगार बनना है।-----2) अपना सब-कुछ ईश्वरीय सेवा में सफल कर, इस पुराने शरीर को भी भूल बाप की याद में रहना है। पूरा कुर्बान जाना है। देही-अभिमानी रहने की मेहनत करनी है।

V- तेरे मेरे की हलचल को समाप्त कर रहम की भावना इमर्ज करने वाले मर्सीफुल भव-----समय प्रति समय कितनी आत्मायें दु:ख की लहर में आती हैं। प्रकृति की थोड़ी भी हलचल होती है, आपदायें आती हैं तो अनेक आत्मायें तड़पती हैं, मर्सी, रहम मांगती हैं। तो ऐसी आत्माओं की पुकार सुन रहम की भावना इमर्ज करो। पूज्य स्वरूप, मर्सीफुल का धारण करो। स्वयं को सम्पन्न बना लो तो यह दु:ख की दुनिया सम्पन्न हो जाए। अभी परिवर्तन के शुभ भावना की लहर तीव्रगति से फैलाओ तो तेरे मेरे की हलचल समाप्त हो जायेगी।

S- व्यर्थ संकल्पों की हथौड़ी से समस्या के पत्थर को तोड़ने के बजाए हाई जम्प दे समस्या रूपी पहाड़ को पार करने वाले बनो।