07-08-2022     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति 18.01.92 "बापदादा"    मधुबन


बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना
 


वरदान:-
समर्पण भाव से सेवा करते सफलता प्राप्त करने वाले सच्चे सेवाधारी भव

सच्चे सेवाधारी वह हैं जो समर्पण भाव से सेवा करते हैं। सेवा में जरा भी मेरे पन का भाव न हो। जहाँ मेरा पन है वहाँ सफलता नहीं। जब कोई यह समझ लेते हैं कि यह मेरा काम है, मेरा विचार है, यह मेरी फर्ज-अदाई है-तो यह मेरापन आना अर्थात् मोह उत्पन्न होना। लेकिन कहाँ भी रहते सदा स्मृति रहे कि मैं निमित्त हूँ, यह मेरा घर नहीं लेकिन सेवा-स्थान है तो समर्पण भाव से निर्मान और नष्टोमोहा बन सफलता को प्राप्त कर लेंगे।

स्लोगन:-
सदा अपने स्वमान की सीट पर रहो तो सर्व शक्तियां आर्डर मानती रहेंगी।