07-11-2019-Hin

“मीठे बच्चे - बाप आये हैं तुम्हें रूहानी हुनर सिखलाने, जिस हुनर से तुम सूर्य-चांद से भी पार शान्तिधाम में जाते हो”

Q- साइन्स घमण्ड और साइलेन्स घमण्ड में कौन-सा अन्तर है?

A- साइन्स घमण्डी चांद सितारों पर जाने के लिए कितना खर्चा करते हैं। शरीर का जोखिम उठाकर जाते हैं। उन्हें यह डर रहता है कि रॉकेट कहाँ फेल न हो जाए। तुम बच्चे साइलेन्स घमण्ड वाले बिगर कौड़ी खर्चा सूर्य-चांद से भी पार मूलवतन में चले जाते हो। तुम्हें कोई डर नहीं क्योंकि तुम शरीर को यहाँ ही छोड़कर जाते हो।

D- 1) बाप से साइलेन्स का हुनर सीखकर इस हद की दुनिया से पार बेहद में जाना है। फ़खुर (नशा) रहे बाप हमें कितना वन्डरफुल ज्ञान देकर, कितनी बड़ी प्राइज़ देते हैं।-----2) बेधड़क होकर बहुत रसीले ढंग से सेवा करनी है। माया की लड़ाई में बलवान बन जीत पानी है। मुरली सुनकर सुजाग रहना है और सबको सुजाग करना है।

V- स्वराज्य के संस्कारों द्वारा भविष्य राज्य अधिकार प्राप्त करने वाली तकदीरवान आत्मा भव-----बहुतकाल के राज्य अधिकारी बनने के संस्कार बहुतकाल भविष्य राज्य अधिकारी बनायेंगे। अगर बार-बार वशीभूत होते हो, अधिकारी बनने के संस्कार नहीं हैं तो राज्य अधिकारियों के राज्य में रहेंगे, राज्य भाग्य प्राप्त नहीं होगा। तो नॉलेज के दर्पण में अपने तकदीर की सूरत को देखो। बहुत समय के अभ्यास द्वारा अपने विशेष सहयोगी कर्मचारी वा राज्य कारोबारी साथियों को अपने अधिकार से चलाओ। राजा बनो तब कहेंगे तकदीरवान आत्मा।

S- सकाश देने की सेवा करने के लिए बेहद की वैराग्य वृत्ति को इमर्ज करो।