08-02-2019-Hin

"मीठे बच्चे - मैं सदा वाणी से परे हूँ, मैं आया हूँ तुम बच्चों को उपराम बनाने, अभी तुम सबकी वानप्रस्थ अवस्था है, अब वाणी से परे घर जाना है''

Q- अच्छा पुरूषार्थी स्टूडेन्ट किसको कहेंगे? उनकी मुख्य निशानी सुनाओ?

A- अच्छा पुरूषार्थी स्टूडेन्ट वह, जो अपने आपसे बातें करना जानता हो, सूक्ष्म स्टडी करता हो। पुरुषार्थी स्टूडेन्ट सदा अपनी जाँच करते रहेंगे कि हमारे में कोई आसुरी स्वभाव तो नहीं है? दैवीगुण कहाँ तक धारण किये हैं? वह अपना रजिस्टर रखते हैं कि भाई-भाई की दृष्टि सदा रहती है? क्रिमिनल ख्यालात तो नहीं चलते हैं?

D- 1) अपनी पढ़ाई का रजिस्टर रखना है। अपना चार्ट देखना है कि हमारी भाई-भाई की दृष्टि कहाँ तक रहती है? हमारा दैवी स्वभाव बना है?-----2) अपनी जबान पर बहुत कन्ट्रोल रखना है। बुद्धि में रहे कि हम देवता बन रहे हैं इसलिए खान-पान पर बहुत ध्यान देना है। जबान चलायमान नहीं होनी चाहिए। माँ-बाप को फालो करना है।

V- हर घड़ी को अन्तिम घड़ी समझ सदा एवररेडी रहने वाले तीव्र पुरूषार्थी भव------अपनी अन्तिम घड़ी का कोई भरोसा नहीं है इसलिए हर घड़ी को अन्तिम घड़ी समझते हुए एवररेडी रहो। एवररेडी अर्थात् तीव्र पुरुषार्थी। ऐसे नहीं सोचो कि अभी तो विनाश होने में कुछ टाइम लगेगा फिर तैयार हो जायेंगे। नहीं। हर घड़ी अन्तिम घड़ी है इसलिए सदा निर्मोही, निर्विकल्प, निरव्यर्थ.. व्यर्थ भी नहीं, तब कहेंगे एवररेडी। कोई भी कार्य रहे हुए हों लेकिन अपनी स्थिति सदा उपराम हो, जो होगा वो अच्छा होगा।

S- अपने हाथ में लॉ उठाना भी क्रोध का अंश है।