08-04-2019-Hin

''मीठे बच्चे - यह संगमयुग उत्तम से उत्तम बनने का युग है, इसमें ही तुम्हें पतित से पावन बन पावन दुनिया बनानी है''

Q- अन्तिम दर्दनाक सीन को देखने के लिए मज़बूती किस आधार पर आयेगी?

A- शरीर का भान निकालते जाओ। अन्तिम सीन बहुत कड़ी है। बाप बच्चों को मजबूत बनाने के लिए अशरीरी बनने का इशारा देते हैं। जैसे बाप इस शरीर से अलग हो तुम्हें सिखलाते हैं, ऐसे तुम बच्चे भी अपने को शरीर से अलग समझो, अशरीरी बनने का अभ्यास करो। बुद्धि में रहे कि अब घर जाना है।

D- 1) अपने आपसे बातें करो - ओहो! बाबा आया है हमारी सर्विस में। वह हमें घर बैठे पढ़ा रहे हैं! बेहद का बाबा बेहद का सुख देने वाला है, उनसे हम अभी मिले हैं। ऐसे प्यार से बाबा कहो और खुशी में प्रेम के आंसू आ जाएं। रोमांच खड़े हो जाएं।-----2) अब वापस घर जाना है इसलिए सबसे ममत्व निकाल जीते जी मरना है। इस देह को भी भूलना है। इससे अलग होने का अभ्यास करना है।

V- कर्मो के हिसाब-किताब को समझकर अपनी अचल स्थिति बनाने वाले सहज योगी भव-----चलते-चलते अगर कोई कर्मो का हिसाब किताब सामने आता है तो उसमें मन को हिलाओ नहीं, स्थिति को नीचे ऊपर नहीं करो। चलो आया तो परखकर उसे दूर से ही खत्म कर दो। अभी योद्धे नहीं बनो। सर्वशक्तिवान बाप साथ है तो माया हिला नहीं सकती। सिर्फ निश्चय के फाउन्डेशन को प्रैक्टिकल में लाओ और समय पर चूज़ करो तो सहजयोगी बन जायेंगे। अब निरन्तर योगी बनो, युद्ध करने वाले योद्धे नहीं।

S- डबल लाइट रहना है तो अपनी सर्व जिम्मेवारियों का बोझ बाप हवाले कर दो।