08.10.2020

"मीठे बच्चे - बाबा आये हैं तुम्हें बहुत रुचि से पढ़ाने, तुम भी रुचि से पढ़ो - नशा रहे हमको पढ़ाने वाला स्वयं भगवान है''

प्रश्नः-

तुम ब्रह्माकुमार-कुमारियों का उद्देश्य वा शुद्ध भावना कौनसी है?

उत्तर:-

तुम्हारा उद्देश्य है - कल्प 5 हज़ार वर्ष पहले की तरह फिर से श्रीमत पर विश्व में सुख और शान्ति का राज्य स्थापन करना। तुम्हारी शुद्ध भावना है कि श्रीमत पर हम सारे विश्व की सद्गति करेंगे। तुम नशे से कहते हो हम सबको सद्गति देने वाले हैं। तुम्हें बाप से पीस प्राइज़ मिलती है। नर्कवासी से स्वर्गवासी बनना ही प्राइज़ लेना है।

वरदान:-

एकाग्रता के अभ्यास द्वारा एकरस स्थिति बनाने वाले सर्व सिद्धि स्वरूप भव

जहाँ एकाग्रता है वहाँ स्वत: एकरस स्थिति है। एकाग्रता से संकल्प, बोल और कर्म का व्यर्थ पन समाप्त हो जाता है और समर्थ पन आ जाता है। एकाग्रता अर्थात् एक ही श्रेष्ठ संकल्प में स्थित रहना। जिस एक बीज रूपी संकल्प में सारा वृक्ष रूपी विस्तार समाया हुआ है। एकाग्रता को बढ़ाओ तो सर्व प्रकार की हलचल समाप्त हो जायेगी। सब संकल्प, बोल और कर्म सहज सिद्व हो जायेंगे। इसके लिए एकान्तवासी बनो।

स्लोगन:-

एक बार की हुई गलती को बार-बार सोचना अर्थात् दाग पर दाग लगाना इसलिए बीती को बिन्दी लगाओ।