08-10-2021 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - अब विदेही बनने का अभ्यास करो, अपनी इस विनाशी देह से प्यार निकाल एक शिवबाबा को प्यार करो''

प्रश्नः-
इस बेहद की पुरानी दुनिया से जिन्हें वैराग्य आ चुका है उनकी निशानी क्या होगी?

उत्तर:-
वह इन आंखों से जो कुछ देखते हैं - वह देखते हुए भी जैसे नहीं देखेंगे। उनकी बुद्धि में यह होगा कि यह सब खत्म होना है। यह सब मरे पड़े हैं। हमको तो शान्तिधाम, सुखधाम में जाना है। उनका ममत्व मिटता जायेगा। योग में रहकर किससे बात करेंगे तो उन्हें भी कशिश होगी। ज्ञान का नशा चढ़ा हुआ होगा।

गीत:-
ओम् नमो शिवाए...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) ज्ञान मार्ग में अपनी अवस्था बहुत मजबूत बनानी है। विदेही बनना है। एक बाप से ही सच्ची-सच्ची प्रीत रखनी है।

2) ड्रामा की भावी पर अडोल रहना है। ड्रामा में जो हुआ सो राइट। कभी डगमग नहीं होना है, किसी भी बात में संशय नहीं लाना है।

वरदान:-
दाता बन हर सेकण्ड, हर संकल्प में दान देने वाले उदारचित, महादानी भव

आप दाता के बच्चे लेने वाले नहीं लेकिन देने वाले हो। हर सेकण्ड हर संकल्प में देना है, जब ऐसे दाता बन जायेंगे तब कहेंगे उदारचित, महादानी। ऐसे महादानी बनने से महान् शक्ति की प्राप्ति स्वत: होती है। लेकिन देने के लिए स्वयं का भण्डारा भरपूर चाहिए। जो लेना था वह सब कुछ ले लिया, बाकी रह गया देना। तो देते जाओ देने से और भी भण्डारा भरता जायेगा।

स्लोगन:-
हर सबजेक्ट में फुल मार्क्स जमा करनी है तो गम्भीरता का गुण धारण करो।


मातेश्वरी जी के अनमोल महावाक्य

1) निराकार परमात्मा का रिजर्व तन ब्रह्मा तन है''

यह तो अपने को पूरा निश्चय है कि परमात्मा अपने साकार ब्रह्मा तन द्वारा आकर पढ़ा रहे हैं, इस प्वाइन्ट पर बहुत जिज्ञासू प्रश्न पूछते हैं कि अमृतवेले समय निराकार परमात्मा जब अपने साकार तन में प्रवेश होते हैं तो उसी समय शरीर में क्या चेंज होती है? वो पूछते हैं क्या तुम उस समय बैठ उनको देखते हो कि कैसे परमात्मा आता है? अब इस पर समझाया जाता है परमात्मा की प्रवेशता होने समय ऐसे नहीं कि उस शरीर के कोई नयन, चयन बदली हो जाते हैं, नहीं। परन्तु हम जब ध्यान में जाते हैं तब नयन, चयन बदली हो जाता है परन्तु इस साकार ब्रह्मा का पार्ट ही गुप्त है। जब परमात्मा इसके तन में आता है तो कोई को भी पता नहीं चलता, उसका यह तन रिजर्व किया हुआ है इसलिए सेकेण्ड में आता है, सेकेण्ड में जाता है, अब इस राज़ को समझना। बाकी ऐसे नहीं कोई प्वाइन्ट समझ में न आवे तो इस पढ़ाई का कोर्स छोड़ देना है। पढ़ाई तो दिन प्रति-दिन गुह्य और क्लियर होती जाती है। सारा कोर्स एकदम तो नहीं पढ़ सकेंगे ना, वैसे आपको समझाया जाता है। और जो भी धर्म पितायें आते हैं उन्हों में भी अपनी अपनी पवित्र आत्मा आए अपना पार्ट बजाती है फिर उन आत्माओं को सुख दु:ख के खेल में आना है, वो वापस नहीं जाते परन्तु जब निराकार सुप्रीम सोल आते हैं तो वो सुख दु:ख से न्यारे हैं, तो वो सिर्फ अपना पार्ट बजाए फिर चले जाते हैं। तो इस ही प्वाइन्ट को हमें बुद्धि से समझना है।

2) आत्मा और परमात्मा में गुणों और ताकत का फर्क''

आत्मा और परमात्मा का अन्तर (भेद) इस पर समझाया जाता है कि आत्मा और परमात्मा का रूप एक जैसा ज्योति रूप है। आत्मा और परमात्मा की आत्मा का साइज एक ही रीति में है, बाकी आत्मा और परमात्मा में सिर्फ गुणों की ताकत का फर्क अवश्य है। अब यह जो इतने गुण हैं वो सारी महिमा परमात्मा की है। परमात्मा दु:ख सुख से न्यारा है, सर्वशक्तिवान है, सर्वगुण सम्पन्न है, 16 कला सम्पूर्ण है, उनकी ही सारी शक्ति काम कर रही है। बाकी मनुष्य आत्मा की कोई शक्ति नहीं चल सकती है। परमात्मा का ही सारा पार्ट चलता है, भल परमात्मा पार्ट में भी आता है, तो भी खुद न्यारा रहता है। लेकिन आत्मा पार्ट में आते भी पार्टधारी के रूप में आ जाती है, परमात्मा पार्ट में आते भी कर्मबन्धन से न्यारा है। आत्मा पार्ट में आते भी कर्मबन्धन के वश हो जाती है, यह है आत्मा और परमात्मा में अन्तर, भेद। अच्छा। ओम् शान्ति।