08-11-2019-Hin

“मीठे बच्चे - बाप है अविनाशी वैद्य, जो एक ही महामंत्र से तुम्हारे सब दु:ख दूर कर देता है”

Q- माया तुम्हारे बीच में विघ्न क्यों डालती है? कोई कारण बताओ?

A- 1. क्योंकि तुम माया के बड़े ते बड़े ग्राहक हो। उसकी ग्राहकी खत्म होती है इसलिए विघ्न डालती है। 2. जब अविनाशी वैद्य तुम्हें दवा देता है तो माया की बीमारी उथलती है इसलिए विघ्नों से डरना नहीं है। मनमनाभव के मंत्र से माया भाग जायेगी।

D- 1) अपनी अवस्था को सदा एकरस और हर्षितमुख रखने के लिए बाप, टीचर और सतगुरू तीनों को याद करना है। यहाँ से ही खुशी के संस्कार भरने हैं। वर्से की स्मृति से चेहरा सदा चमकता रहे।-----2) श्रीमत पर चलकर सारे विश्व को चेन्ज करने की सेवा करनी है। 5 विकारों में जो फँसे हैं, उन्हें निकालना है। अपने स्वधर्म की पहचान देनी है।

V- स्व के राज्य द्वारा अपने साथियों को स्नेही सहयोगी बनाने वाले मास्टर दाता भव-----राजा अर्थात् दाता। दाता को कहना वा मांगना नहीं पड़ता। स्वयं हर एक राजाओं को अपने स्नेह की सौगात आफर करते हैं। आप भी स्व पर राज्य करने वाले राजा बनो तो हर एक आपके आगे सहयोग की सौगात आफर करेंगे। जिसका स्व पर राज्य है उसके आगे लौकिक अलौकिक साथी जी हाजिर, जी हजूर, हाँ जी कहते हुए स्नेही-सहयोगी बनते हैं। परिवार में कभी आर्डर नहीं चलाना, अपनी कर्मेन्द्रियों को आर्डर में रखना तो आपके सर्व साथी आपके स्नेही, सहयोगी बन जायेंगे।

S- सर्व प्राप्ति के साधन होते भी वृत्ति उपराम रहे तब कहेंगे वैराग्य वृत्ति।