09-01-2019-Hin

"मीठे बच्चे - बाबा को प्यार से याद करते रहो, श्रीमत पर सदा चलो, पढ़ाई पर पूरा अटेन्शन दो तो तुम्हें सब रिगॉर्ड देंगे।''

Q- अतीन्द्रिय सुख का अनुभव किन बच्चों को हो सकता है?

A- 1- जो देही-अभिमानी हैं, इसके लिए जब किसी से बात करते हो या समझाते हो तो समझो मैं आत्मा भाई से बात करता हूँ। भाई-भाई की दृष्टि पक्की करने से देही-अभिमानी बनते जायेंगे। 2- जिन्हें नशा है कि हम भगवान के स्टूडेन्ट हैं उन्हें ही अतीन्द्रिय सुख का अनुभव होगा।

D- 1) सत्य ज्ञान को बुद्धि में धारण करने के लिए बुद्धि रूपी बर्तन को स़ाफ स्वच्छ बनाना है। व्यर्थ बातों को बुद्धि से निकाल देना है।-----2) दैवी गुणों की धारणा और पढ़ाई पर पूरा अटेन्शन दे अतीन्द्रिय सुख का अनुभव करना है। सदा इसी नशे में रहना है कि हम भगवान के बच्चे हैं, वही हमको पढ़ाते हैं।

V- प्राप्ति स्वरूप बन क्यों, क्या के प्रश्नों से पार रहने वाले सदा प्रसन्नचित भव-----जो प्राप्ति स्वरूप सम्पन्न आत्मायें हैं उन्हें कभी भी किसी भी बात में प्रश्न नहीं होगा। उसके चेहरे और चलन में प्रसन्नता की पर्सनैलिटी दिखाई देगी, इसको ही सन्तुष्टता कहते हैं। प्रसन्नता अगर कम होती है तो उसका कारण है प्राप्ति कम और प्राप्ति कम का कारण है कोई न कोई इच्छा। बहुत सूक्ष्म इच्छायें अप्राप्ति के तरफ खींच लेती हैं, इसलिए अल्पकाल की इच्छाओं को छोड़ प्राप्ति स्वरूप बनो तो सदा प्रसन्नचित रहेंगे।

S- परमात्म प्यार में लवलीन रहो तो माया की आकर्षण समाप्त हो जायेगी।