09-02-2020-Hin

संगमयुगी ब्राह्मणों का न्यारा, प्यारा श्रेष्ठ संसार

V- संगठन में रहते लक्ष्य और लक्षण को समान बनाने वाले सदा शक्तिशाली आत्मा भव-----संगठन में एक दो को देखकर उमंग उत्साह भी आता है तो अलबेलापन भी आता है। सोचते हैं यह भी करते हैं, हमने भी किया तो क्या हुआ, इसलिए संगठन से श्रेष्ठ बनने का सहयोग लो। हर कर्म करने के पहले यह विशेष अटेन्शन वा लक्ष्य हो कि मुझे स्वयं को सम्पन्न बनाकर सैम्पुल बनना है। मुझे करके औरों को कराना है। फिर बार-बार इस लक्ष्य को इमर्ज करो। लक्ष्य और लक्षण को मिलाते चलो तो शक्तिशाली हो जायेंगे।

S- लास्ट में फास्ट जाना है तो साधारण और व्यर्थ संकल्पों में समय नहीं गंवाओ।