09.09.2020

''मीठे बच्चे - हर बात में योग बल से काम लो, बाप से कुछ भी पूछने की बात नहीं है, तुम ईश्वरीय सन्तान हो इसलिए कोई भी आसुरी काम न करो''

प्रश्नः-

तुम्हारे इस योगबल की करामात क्या है?

उत्तर:-

यही योगबल है जिससे तुम्हारी सब कर्मेन्द्रियाँ वश हो जाती हैं। योग बल के सिवाए तुम पावन बन नहीं सकते। योगबल से ही सारी सृष्टि पावन बनती है इसलिए पावन बनने के लिए वा भोजन को शुद्ध बनाने के लिए याद की यात्रा में रहो। युक्ति से चलो। नम्रता से व्यवहार करो।

वरदान:-

मास्टर ज्ञान सागर बन ज्ञान की गहराई में जाने वाले अनुभव रूपी रत्नों से सम्पन्न भव

जो बच्चे ज्ञान की गहराई में जाते हैं वे अनुभव रूपी रत्नों से सम्पन्न बनते हैं। एक है ज्ञान सुनना और सुनाना, दूसरा है अनुभवी मूर्त बनना। अनुभवी सदा अविनाशी और निर्विघ्न रहते हैं। उन्हें कोई भी हिला नहीं सकता। अनुभवी के आगे माया की कोई भी कोशिश सफल नहीं होती। अनुभवी कभी धोखा नहीं खा सकते इसलिए अनुभवों को बढ़ाते हुए हर गुण के अनुभवी मूर्त बनो। मनन शक्ति द्वारा शुद्ध संकल्पों का स्टॉक जमा करो।

स्लोगन:-

फरिश्ता वह है जो देह के सूक्ष्म अभिमान के सम्बन्ध से भी न्यारा है।