09.10.2020

"मीठे बच्चे - सवेरे-सवेरे उठ बाबा से मीठी-मीठी बातें करो, विचार सागर मंथन करने के लिए सवेरे का टाइम बहुत अच्छा है''

प्रश्नः-

भक्त भी भगवान को सर्वशक्तिमान् कहते हैं और तुम बच्चे भी, लेकिन दोनों में अन्तर क्या है?

उत्तर:-

वह कहते भगवान तो जो चाहे वह कर सकता है। सब कुछ उसके हाथ में है। लेकिन तुम जानते हो बाबा ने कहा है मैं भी ड्रामा के बंधन में बांधा हुआ हूँ। ड्रामा सर्वशक्तिमान् है। बाप को सर्वशक्तिमान् इसलिए कहा जाता क्योंकि उनके पास सर्व को सद्गति देने की शक्ति है। ऐसा राज्य स्थापन करता जिसे कभी कोई छीन नहीं सकता।

वरदान:-

स्व स्थिति द्वारा परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने वाले संगमयुगी विजयी रत्न भव

परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने का साधन है स्व-स्थिति। यह देह भी पर है, स्व नहीं। स्व स्थिति व स्वधर्म सदा सुख का अनुभव कराता है और प्रकृति-धर्म अर्थात् पर धर्म या देह की स्मृति किसी न किसी प्रकार के दु:ख का अनुभव कराती है। तो जो सदा स्व स्थिति में रहता है वह सदा सुख का अनुभव करता है, उसके पास दु:ख की लहर आ नहीं सकती। वह संगमयुगी विजयी रत्न बन जाते हैं।

स्लोगन:-

परिवर्तन शक्ति द्वारा व्यर्थ संकल्पों के बहाव का फोर्स समाप्त करो।