09.11.2020

"मीठे बच्चे - तुम्हारा यह टाइम बहुत-बहुत वैल्युबुल है, इसलिए इसे व्यर्थ मत गँवाओ, पात्र को देखकर ज्ञान दान करो''

प्रश्नः-

गुणों की धारणा भी होती जाए और चलन भी सुधरती रहे उसकी सहज विधि क्या है?

उत्तर:-

जो बाबा ने समझाया है - वह दूसरों को समझाओ। ज्ञान धन का दान करो तो गुणों की धारणा भी सहज होती जायेगी, चलन भी सुधरती रहेगी। जिनकी बुद्धि में यह नॉलेज नहीं रहती है, ज्ञान धन का दान नहीं करते, वह हैं मनहूस। वह मुफ्त अपने को घाटा डालते हैं।

वरदान:-

नम्रता रूपी कवच द्वारा व्यर्थ के रावण को जलाने वाले सच्चे स्नेही, सहयोगी भव

कोई कितना भी आपके संगठन में कमी ढूंढने की कोशिश करे लेकिन जरा भी संस्कार-स्वभाव का टक्कर दिखाई न दे। अगर कोई गाली भी दे, इनसल्ट भी करे, आप सेन्ट बन जाओ। अगर कोई रांग भी करता तो आप राइट रहो। कोई टक्कर लेता है तो भी आप उसे स्नेह का पानी दो। यह क्यों, ऐसा क्यों-यह संकल्प करके आग पर तेल नहीं डालो। नम्रता का कवच पहनकर रहो। जहाँ नम्रता होगी वहाँ स्नेह और सहयोग भी अवश्य होगा।

स्लोगन:-

मेरेपन की अनेक हद की भावनायें एक "मेरे बाबा'' में समा दो।