10-01-2017-Hin

“मीठे बच्चे– आधाकल्प से जो 5 विकारों की बीमारियाँ लगी हुई थी वह अब छूटी कि छूटी, इसलिए अपार खुशी में रहना है”

Q- तुम बच्चों को अब कौन सी एक हॉबी (शौक) रखना है, किन बातों से तुम्हारा तैलुक नहीं?

A- एक बाप से पूरा वर्सा लेने की हॉबी रखनी है। मनुष्यों को तो अनेक प्रकार की हॉबियाँ होती हैं। तुम्हें वह सब छोड़ देनी है। तुम ईश्वर वे बच्चे बने हो, बाप के साथ वापिस जाना है इसलिए इस शरीर से तैलुक रखने वाली सब बातों को भूल जाना है। पेट को दो रोटी खिलानी है और बुद्धि नई दुनिया से लगानी है।

D- 1) विजय माला में आने के लिए मम्मा बाबा के समान सर्विस करनी है। मुरली धारण कर फिर सुनानी है। चलन बड़ी रॉयल रखनी है। 2) अपनी विशाल बुद्धि से इस बेहद ड्रामा को जान अपार खुशी में रहना है। तूफानों से डरना नहीं है। ज्ञान मंथन से बुद्धि को भरपूर रखना है।

V- देह-अभिमान के अंशमात्र की भी बलि चढ़ाने वाले महाबलवान भव ! --------- सबसे बड़ी कमजोरी है देह-अभिमान। देह-अभिमान का सूक्ष्म वंश बहुत बड़ा है। देह-अभिमान की बलि चढ़ाना अर्थात् अंश और वंश सहित समार्पित होना। ऐसे बलि चढ़ाने वाले ही महाबलवान बनते हैं। यदि देह अभिमान का कोई भी अंश छिपाकर रख लिया, अभिमान को ही स्वमान समझ लिया तो उसमें अल्पकाल की विजय भल दिखाई देगी लेकिन बहुतकाल की हार समाई हुई है।

S- इच्छा नहीं थी लेकिन अच्छा लग गया-यह भी जीवनबंध स्थिति है।