10-01-2019-Hin

"मीठे बच्चे - बाप का बनकर बाप का नाम बाला करो, नाम बाला होगा सम्पूर्ण पवित्र बनने से, तुम्हें सम्पूर्ण मीठा भी बनना है''

Q- संगमयुग पर तुम बच्चों को कौन-सी एक फिक्र है जो सतयुग में नहीं होगी?

A- संगम पर तुम्हें पावन बनने की ही फिक्र है, बाप ने तुम्हें और सब बातों से बेफिक्र बना दिया। तुम पुरूषार्थ करते हो कि यह पुराना शरीर खुशी-खुशी से छूटे। तुम जानते हो पुराना वस्त्र उतार नया लेंगे। हरेक बच्चे को अपनी दिल से पूछना है कि हमें कितनी खुशी रहती है, हम बाप को कितना याद करते हैं।

D- 1) अपने आपसे पूछो कि - 1) हमें खुशी कहाँ तक रहती है? 2) सर्वगुण सम्पन्न थे, अब श्रीमत पर फिर बनना है, यह निश्चय कहाँ तक है? 3) हम सतोप्रधान कहाँ तक बने हैं? दिन-रात सतोप्रधान (पावन) बनने की फिकरात रहती है?-----2) बेहद बाप के साथ विश्व की खिदमत (सेवा) करनी है। बेहद की पढ़ाई पढ़नी और पढ़ानी है। देह सहित जो भी बंधन हैं उन्हें बाप की याद से खलास कर देना है।

V- सेवा में मान-शान के कच्चे फल को त्याग सदा प्रसन्नचित रहने वाले अभिमान मुक्त भव-----रॉयल रूप की इच्छा का स्वरूप नाम, मान और शान है। जो नाम के पीछे सेवा करते हैं, उनका नाम अल्पकाल के लिए हो जाता है लेकिन ऊंच पद में नाम पीछे हो जाता है क्योंकि कच्चा फल खा लिया। कई बच्चे सोचते हैं कि सेवा की रिजल्ट में मेरे को मान मिलना चाहिए। लेकिन यह मान नहीं अभिमान हैं। जहाँ अभिमान है वहाँ प्रसन्नता नहीं रह सकता, इसलिए अभिमान मुक्त बन सदा प्रसन्नता का अनुभव करो।

S- परमात्म प्यार के सुखदाई झूले में झूलो तो दु:ख की लहर आ नहीं सकती।