10.01.2021

वरदान:-

रहमदिल की भावना द्वारा अपकारी पर भी उपकार करने वाले शुभचिंतक भव

कैसी भी कोई आत्मा, चाहे सतोगुणी, चाहे तमोगुणी सम्पर्क में आये लेकिन सभी के प्रति शुभचिंतक अर्थात् अपकारी पर भी उपकार करने वाले। कभी किसी आत्मा के प्रति घृणा दृष्टि न हो क्योंकि जानते हो यह अज्ञान के वशीभूत है, बेसमझ है। उनके ऊपर रहम वा स्नेह आये, घृणा नहीं। शुभचिंतक आत्मा ऐसा नहीं सोचेगी कि इसने ऐसा क्यों किया लेकिन इस आत्मा का कल्याण कैसे हो - यही है शुभचिंतक स्टेज।

स्लोगन:-

तपस्या के बल से असम्भव को सम्भव कर सफलता मूर्त बनो।