10-04-2019-Hin

''मीठे बच्चे - यह वन्डरफुल पढ़ाई बेहद का बाप पढ़ाते हैं, बाप और उनकी पढ़ाई में कोई भी संशय नहीं आना चाहिए, पहला निश्चय चाहिए कि हमें पढ़ाने वाला कौन''

Q- तुम बच्चों को निरन्तर याद की यात्रा में रहने की श्रीमत क्यों मिली है?

A- क्योंकि माया दुश्मन अभी भी तुम्हारे पीछे है, जिसने तुमको गिराया है। अभी वह तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेगा इसलिए ग़फलत नहीं करना। भल तुम संगमयुग पर हो परन्तु आधाकल्प उसके रहे हो इसलिए जल्दी नहीं छोड़ेगा। याद भूली और माया ने विकर्म कराया इसलिए ख़बरदार रहना है। आसुरी मत पर नहीं चलना है।

D- 1. सदा नशा और निश्चय रहे कि हमें पढ़ाने वाला कोई जिस्मानी टीचर नहीं। स्वयं ज्ञान सागर निराकार बाप टीचर बन हमें पढ़ा रहे हैं। इस पढ़ाई से ही हमें सतोप्रधान बनना है।-----2. आत्मा रूपी दीपक में रोज़ ज्ञान का घृत डालना है। ज्ञान घृत से सदा ऐसा प्रज्जवलित रहना है जो माया का कोई भी त़ूफान हिला न सके। पूरा परवाना बन शमा पर फिदा होना है।

V- मन-बुद्धि को झमेलों से किनारे कर मिलन मेला मनाने वाले झमेलामुक्त भव-----कई बच्चे सोचते हैं यह झमेला पूरा होगा तो हमारी अवस्था वा सेवा अच्छी हो जायेगी लेकिन झमेले पहाड़ के समान हैं। पहाड़ नहीं हटेगा, लेकिन जहाँ झमेला हो वहाँ अपने मन-बुद्धि को किनारे कर लो या उड़ती कला से झमेले के पहाड़ के भी ऊपर चले जाओ तो पहाड़ भी आपको सहज अनुभव होगा। झमेलों की दुनिया में झमेले तो आयेंगे ही, आप मुक्त रहो तो मिलन मेला मना सकेंगे।

S- इस बेहद नाटक में हीरो पार्ट बजाने वाले ही हीरो पार्टधारी हैं।