10.07.2020

"मीठे बच्चे - तुम इस पढ़ाई से अपने सुखधाम जाते हो वाया शान्तिधाम, यही तुम्हारी एम आब्जेक्ट है, यह कभी नहीं भूलनी चाहिए''

प्रश्नः-

तुम बच्चे साक्षी होकर इस समय ड्रामा की कौन-सी सीन देख रहे हो?

उत्तर:-

इस समय ड्रामा में टोटल दु:ख की सीन है। अगर किसी को सुख है भी तो अल्पकाल काग विष्टा समान। बाकी दु:ख ही दु:ख है। तुम बच्चे अभी रोशनी में आये हो। जानते हो सेकण्ड बाई सेकण्ड बेहद सृष्टि का चक्र फिरता रहता है, एक दिन न मिले दूसरे से। सारी दुनिया की एक्ट बदलती रहती है। नई सीन चलती रहती है।

वरदान:-

निरन्तर याद द्वारा अविनाशी कमाई जमा करने वाले सर्व खजानों के अधिकारी भव

निरन्तर याद द्वारा हर कदम में कमाई जमा करते रहो तो सुख, शान्ति, आनंद, प्रेम...इन सब खजानों के अधिकार का अनुभव करते रहेंगे। कोई कष्ट, कष्ट अनुभव नहीं होंगे। संगम पर ब्राह्मणों को कोई कष्ट हो नहीं सकता। यदि कोई कष्ट आता भी है तो बाप की याद दिलाने के लिए, जैसे गुलाब के पुष्प के साथ कांटा उनके बचाव का साधन होता है। वैसे यह तकलीफें और ही बाप की याद दिलाने के निमित्त बनती हैं।

स्लोगन:-

स्नेह रूप का अनुभव तो सुनाते हो अब शक्ति रूप का अनुभव सुनाओ।