10-09-2021 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - तुम रूहानी बाप से नई-नई रूहानी बातें सुन रहे हो, तुम जानते हो जैसे हम आत्मायें अपना रूप बदलकर आये हैं, वैसे बाप भी आये हैं''

प्रश्नः-
छोटे-छोटे बच्चे बाप की समझानी पर अच्छी रीति ध्यान दें, तो कौन सा टाइटल ले सकते हैं?

उत्तर:-
स्प्रीचुअल लीडर का। छोटे बच्चे अगर कोई हिम्मत का काम करके दिखायें, बाप से जो सुनते हैं उस पर ध्यान दें और दूसरों को समझायें तो उन्हें सब बहुत प्यार करेंगे। बाप का नाम भी बाला हो जायेगा।

गीत:-
छोड़ भी दे आकाश सिंहासन....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) इस पुरानी छी-छी गोबर मिसल दुनिया को बुद्धि से भूल सतयुगी दुनिया को याद कर अपार खुशी व नशे में रहना है। कभी भी रोना नहीं है।

2) बाप जो गुह्य रमणीक बातें सुनाते हैं उन्हें धारण कर सबको समझाना है। स्प्रीचुअल लीडर का टाइटल लेना है।

वरदान:-
कर्म करते हुए कर्म के बन्धन से मुक्त रहने वाले सहजयोगी स्वत: योगी भव

जो महावीर बच्चे हैं उन्हें साकारी दुनिया की कोई भी आकर्षण अपनी तरफ आकर्षित नहीं कर सकती। वे स्वयं को एक सेकण्ड में न्यारा और बाप का प्यारा बना सकते हैं। डायरेक्शन मिलते ही शरीर से परे अशरीरी, आत्म-अभिमानी, बन्धन-मुक्त, योगयुक्त स्थिति का अनुभव करने वाले ही सहजयोगी, स्वत: योगी, सदा योगी, कर्मयोगी और श्रेष्ठ योगी हैं। वह जब चाहें, जितना समय चाहें अपने संकल्प, श्वांस को एक प्राणेश्वर बाप की याद में स्थित कर सकते हैं।

स्लोगन:-
एकरस स्थिति के श्रेष्ठ आसन पर विराजमान रहना - यही तपस्वी आत्मा की निशानी है।