11-02-2020-Hin

“मीठे बच्चे - तुम्हें अपार खुशी होनी चाहिए कि हम अभी पुराना कपड़ा छोड़ घर जायेंगे फिर नया कपड़ा नई दुनिया में लेंगे”

Q- ड्रामा का कौन-सा राज़ अति सूक्ष्म समझने का है?

A- यह ड्रामा जूँ मिसल चलता रहता है, टिक-टिक होती रहती है। जिसकी जो एक्ट चली वह फिर हूबहू 5 हज़ार वर्ष के बाद रिपीट होगी, यह राज़ बहुत सूक्ष्म समझने का है। जो बच्चे इस राज़ को यथार्थ नहीं समझते तो कह देते ड्रामा में होगा तो पुरूषार्थ कर लेंगे, वह ऊंच पद नहीं पा सकते।

D- 1) ऊंच पद पाने के लिए बाप का पूरा-पूरा मददगार बनना है। अन्धों को रास्ता दिखाना है। बेहद की घड़ी को सदा याद रखना है।-----2) यज्ञ की सम्भाल करने के लिए सच्चा-सच्चा ब्राह्मण बनना है। पैसे आदि जो हैं उन्हें सफल कर बाप से पूरा-पूरा वर्सा लेना है।

V- स्व-उन्नति द्वारा सेवा में उन्नति करने वाले सच्चे सेवाधारी भव-----स्व-उन्नति सेवा की उन्नति का विशेष आधार है। स्व-उन्नति कम है तो सेवा भी कम है। सिर्फ किसी को मुख से परिचय देना ही सेवा नहीं है लेकिन हर कर्म द्वारा श्रेष्ठ कर्म की प्रेरणा देना यह भी सेवा है। जो मन्सा-वाचा-कर्मणा सदा सेवा में तत्पर रहते हैं उन्हें सेवा द्वारा श्रेष्ठ भाग्य का अनुभव होता है। जितनी सेवा करते उतना स्वयं भी आगे बढ़ते हैं। अपने श्रेष्ठ कर्म द्वारा सेवा करने वाले सदा प्रत्यक्षफल प्राप्त करते रहते हैं।

S- समीप आने के लिए सोचना-बोलना और करना समान बनाओ।